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श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए दी आहुति, अयोध्या में श्रीजियर स्वामी बोले- अश्लील दृश्यों से उपजते हैं मानसिक विकार

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श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए दी आहुति, अयोध्या में श्रीजियर स्वामी बोले- अश्लील दृश्यों से उपजते हैं मानसिक विकार


श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए दी आहुति, अयोध्या में श्रीजियर स्वामी बोले- अश्लील दृश्यों से उपजते हैं मानसिक विकार


- राजघाट अयोध्या में महायज्ञ की गूंज, ढाई हजार यजमानों ने किया मंडप प्रवेश

अयोध्या, 21 मार्च (हि.स.)। राजघाट अयोध्या में आयोजित 10 दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ शनिवार को आध्यात्मिक आस्था, वैदिक मंत्रोच्चार और संत प्रवचनों से गुंजायमान रहा। महायज्ञ के तहत शनिवार को करीब ढाई हजार यजमान श्रीजियर स्वामी जी महाराज के सानिध्य में यज्ञ मंडप में प्रवेश किए। दर्जनों आचार्यों की मंत्रध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

एक ओर भव्य यज्ञ मंडप में हजारों की संख्या में यजमान विश्व कल्याण की कामना के साथ पूजन-अनुष्ठान में शामिल रहे तो दूसरी ओर विशाल प्रवचन पंडाल में देश के विभिन्न कोनों से पहुंचे संत-महात्मा श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और सदाचार का संदेश दे रहे हैं।

प्रवचन के दौरान श्रीजियर स्वामी महाराज ने कहा कि अश्लील दृश्यों, अश्लील गीतों और अश्लील वार्ताओं से मन में विकृति पैदा होती है। इससे मस्तिष्क में कुविचार जन्म लेते हैं और मानव जीवन अपने मूल उद्देश्यों से भटक जाता है। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और देश के स्तर पर अश्लीलता के प्रति सजग और वर्जनात्मक संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है।

स्वामी ने अपने प्रवचन में अजामिल प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार का अश्लील दृश्य भी जीवन को भटका सकता है, जबकि संतों का थोड़े समय का सान्निध्य भी जीवन को मंगलमय बना सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म को समझकर करना चाहिए, केवल परंपरा के आधार पर नहीं। हवन और जाप की विधि बताते हुए उन्होंने कहा कि आहुति तीन अंगुलियों—अंगूठा, मध्यमा और अनामिका—के सहारे देनी चाहिए, पांचों अंगुलियों से नहीं।

मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा ने बताया कि यज्ञ समिति के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रचारक कमलेश सिंह, डॉ. प्रकाश रंजन सहित बड़ी संख्या में लोग आयोजन की व्यवस्था और विधि-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे हैं। यजमानों के ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था के लिए बड़े क्षेत्र में टेंट लगाए गए हैं। दूर से ही महायज्ञ की भव्यता आकर्षित कर रही है। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर पहुंचकर स्वामी जी महाराज के दर्शन कर रहे हैं।

महायज्ञ स्थल पर उमड़ रही श्रद्धा और अनुशासित व्यवस्थाओं ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया है। राजघाट का यह आध्यात्मिक आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र बना है, बल्कि समाज को संस्कार, संयम और सदाचार का संदेश भी दे रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश