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कैलाश खेर की सूफियाना आवाज और रामधुन ने बांधा समां

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कैलाश खेर की सूफियाना आवाज और रामधुन ने बांधा समां


कानपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। शरद पूर्णिमा की शाम सूफियाना संगीत और रामभक्ति के सुरों से सराबोर हो उठी। श्रीरामलीला सोसाइटी परेड के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में मशहूर गायक कैलाश खेर ने अपनी दमदार आवाज और अनूठे अंदाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कैलासा बैंड के साथ मंच पर पहुंचे कैलाश खेर ने एक के बाद एक लोकप्रिय गीत सुनाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके गीतों में सूफियाना रंग के साथ आध्यात्मिकता और रामभक्ति की झलक भी देखने को मिली।

कैलाश खेर ने ‘जाना जोगी दे नाल’ से अपनी प्रस्तुति का आगाज किया। इसके बाद ‘आदि योगी’, ‘आओ जी आओ जी’ और ‘राम ही पार लगाएंगे’ जैसे गीतों ने माहौल को संगीतमय बना दिया। ‘रंग दीनी रंग दीनी’, ‘तू जाने ना’ और ‘तेरे बिन नहीं लगदा दिल मेरा ढोलना’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर भी श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। वहीं, रामभक्ति से जुड़े गीतों और ‘राम का रतजगा’ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

मंच से श्रोताओं का अभिवादन करते हुए कैलाश खेर ने शरद पूर्णिमा पर इस आयोजन को सुखद अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि संगीत के माध्यम से लोगों को परमात्मा और आत्मा से जुड़ी आध्यात्मिक अनुभूति कराना चाहते हैं। उन्होंने दर्शकों से केवल बैठकर कार्यक्रम देखने के बजाय गीतों के साथ गाने और झूमने की अपील की। कहा कि कैलासा लाइव की असली खूबसूरती तभी है, जब कलाकार के साथ श्रोता भी प्रस्तुति का हिस्सा बनें।

कानपुर की संस्कृति और आयोजन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कैलाश खेर ने कहा कि यह नारायण की धरती है, जहां आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति को भी सहेजकर रखा गया है। उन्होंने शहर में आए बदलाव और दर्शकों के अनुशासन का उल्लेख करते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की व्यवस्था की तारीफ की। अपने खास अंदाज में उन्होंने कहा, ''महाराज, गजब व्यवस्था की है, मजा आ गइस।'' उन्होंने बिठूर से चंदन मंगवाकर माथे पर लगाने का जिक्र भी किया।

सूफियाना संगीत, लोकप्रिय फिल्मी गीतों और रामधुन के अनूठे संगम ने समारोह को यादगार बना दिया। कैलाश खेर की आवाज पर झूमते श्रोताओं के बीच भक्ति और संगीत का ऐसा मेल देखने को मिला, जिसने शरद पूर्णिमा की शाम को खास बना दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप