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फर्रुखाबाद का लाल लद्दाख में शहीद

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फर्रुखाबाद का लाल लद्दाख में शहीद


फर्रुखाबाद ,7 मार्च (हि.स.)। जनपद के थाना नवाबगंज अंतर्गत गांव कलौली महबुल्लापुर में उस वक्त मातम छा गया, जब लद्दाख में तैनात भारतीय सेना के जांबाज हवलदार कुलदीप यादव (34) के शहीद होने की खबर आई। शनिवार को जब शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो 'भारत माता की जय' और 'कुलदीप यादव अमर रहे' के नारों से आसमान गूंज उठा। नम आंखों के बीच राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

हवलदार कुलदीप यादव सेना की 872 लाइट रेजिमेंट में तैनात थे और वर्तमान में लेह के पत्तापुर में नए जवानों को प्रशिक्षण दे रहे थे। बीते 2 मार्च को ट्रेनिंग से लौटते समय भूस्खलन के कारण कुलदीप अपने 8 साथियों के साथ बर्फ में दब गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें सुरक्षित निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिन के इलाज के बाद वे स्वस्थ होकर 5 मार्च को अपनी यूनिट में रिपोर्ट करने पहुंचे। जैसे ही वे यूनिट के गेट पर पहुंचे, अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शनिवार दोपहर जब सेना के विशेष वाहन से शहीद का शव गांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया। कलौली मोड़ से घर तक 2 किलोमीटर के दायरे में हजारों युवाओं का हुजूम तिरंगा लेकर साथ चल रहा था। कर्नल अभिषेक गुप्ता और लेफ्टिनेंट कर्नल प्राग शर्मा के नेतृत्व में 25 जवानों की टुकड़ी ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। एसडीएम सदर रजनीकांत, क्षेत्राधिकारी अजय वर्मा और तहसीलदार सहित भारी पुलिस बल और कई सेवानिवृत्त सैनिक श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

शहादत का सबसे भावुक क्षण तब आया जब शहीद कुलदीप के 5 वर्षीय पुत्र राम ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। पिता की शहादत से अनजान मासूम को देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक उठीं। कुलदीप अपने पीछे पत्नी प्रियंका, 6 वर्षीय पुत्री मन्नत, पुत्र राम और पांच भाइयों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके एक भाई सुरजीत भी वर्तमान में सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कुलदीप एक जांबाज सैनिक थे। उनकी शहादत पर न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे जनपद और देश को गर्व है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar