एसजीपीजीआई लखनऊ में किया गया पहला हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण
लखनऊ, 29 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के चिकित्सकों ने प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक और कीर्तिमान बनाते हुए एएलपीएस नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग में पहला हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया है।
चार वर्ष की उम्र में बबलू (नाम परिवर्तित) को बार-बार मुंह में दर्दनाक छाले और गंभीर खुजलीदार लाल त्वचा के घाव होने लगे और धीरे-धीरे उसका लीवर व तिल्ली बढ़ गये और उसके पूरे शरीर में लिम्फनोड्स हो गए। उसे एनीमिया था, जिसे नियंत्रित करने के लिए स्टेरॉयड की आवश्यकता थी। आठ साल की उम्र में कई परीक्षणों और बार-बार अस्पताल में भर्ती होने के बाद बच्चे को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई रेफर किया गया। वहां बबलू को ऑटोइम्यून लिम्फोप्रोलिफेरेटिव सिंड्रोम नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार होने का पता चला।
इस विकार में, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं से ही लड़ने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप लाल रक्त कोशिकाओं में कमी आ जाती है, जिससे एनीमिया होता है, न्यूट्रोफिल में कमी, जिससे संक्रमण होता है और प्लेटलेट्स की कमी, जिससे रक्तस्राव होता है। मरीज़ों को त्वचा पर गंभीर चकत्ते, मुंह में छाले और विभिन्न अंगों में सूजन हो जाती है। समय के साथ, उनमें से अधिकांश को लिम्फोमा जैसे कैंसर हो जाते हैं और गंभीर मामलों में उनकी मृत्यु भी हो जाती है। उपचार में स्टेरॉयड का प्रयोग जारी रहता है, जिसके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं।
एसजीपीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कौशिक मंडल के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया। इसके लिए संस्थान के निदेशक प्रो.आर.के.धीमान ने चिकित्सकों को शुभकामनाएं दी है।
प्रत्यारोपण टीम के प्रमुख सदस्य व हेमेटोलॉजी विभाग के डॉ. सायन सिन्हा रॉय ने बताया कि इस प्रक्रिया में पिता ही डोनर थे, इसलिए एचएलए का आधा मिलान हुआ (जिसे हैप्लोआइडेंटिकल कहा जाता है) और यह प्रक्रिया बहुत ही जोखिम भरी थी। टीम में डॉ. राजेश कश्यप, डॉ. चंद्रचूड़ पोटदार, डॉ. मनोज कुमार सिंह और डॉ. खलीकुर रहमान शामिल थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

