हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर संगोष्ठी, एआई और चुनौतियों पर गहन मंथन : कुलपति
कानपुर, 11 अप्रैल (हि.स.)। हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा हमें यह सिखाती है कि तकनीक के इस दौर में भी सत्य, विश्वसनीयता और जनजागरण की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है, और पत्रकारिता के छात्रों को एआई के साथ मानवीय मूल्यों को संतुलित करना होगा।” सीएसजेएमयू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। यह बातें शनिवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कही।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ तात्या टोपे सीनेट हॉल में हुआ। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के शिक्षाविद, शोधार्थी, विद्यार्थी और पत्रकार शामिल हुए।
मुख्य अतिथि प्रो. राममोहन पाठक ने हिंदी को केवल संप्रेषण का माध्यम न मानकर संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने पर बल दिया। मुख्य वक्ता आशुतोष शुक्ला ने 1826 में ‘उदंत मार्तंड’ से शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता की यात्रा को वर्तमान संदर्भों से जोड़ते हुए कहा कि एआई के दौर में भी मानवीय संवेदनाएं और मूल्यों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अरुण कुमार भगत और विषय प्रवर्तक प्रो. वीरेंद्र कुमार व्यास ने पत्रकारिता के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। दूसरे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने निष्पक्षता और जिम्मेदारी को पत्रकारिता की मूल आत्मा बताया।
कार्यक्रम में चीन और नेपाल से जुड़े वक्ताओं ने भी ऑनलाइन सहभागिता कर हिंदी के वैश्विक प्रसार और पत्रकारिता के प्रभाव पर विचार रखे। साथ ही, स्वतंत्रता के बाद के अखबारों की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन को और आकर्षक बनाया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

