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मुक्त विवि का सूत्र वाक्य शिक्षार्थी देवो भव : कुलपति

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मुक्त विवि का सूत्र वाक्य शिक्षार्थी देवो भव : कुलपति


--माघ मेला शिविर में दूरस्थ शिक्षा पर संगोष्ठी

प्रयागराज, 21 जनवरी, (हि.स)। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में लाल सड़क मार्ग सेक्टर 3 स्थित विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा जागरूकता शिविर में वर्तमान परिवेश में दूरस्थ शिक्षा की प्रासंगिकता विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन बुधवार को किया गया।

इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा का क्षेत्र बहुत व्यापक है। वर्तमान परिवेश में दूरस्थ शिक्षा की प्रासंगिकता बहुत अधिक है। यह शिक्षा का एक ऐसा तरीका है जो छात्रों को घर बैठे या अपने समय और गति के अनुसार अध्ययन करने की सुविधा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि माघ मेला में दूरस्थ शिक्षा का प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। मुक्त विश्वविद्यालय की ख्याति बढ़ रही है। हमें अधिक से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए उनकी सेवा करनी चाहिए। विश्वविद्यालय ने अपने सूत्र वाक्य शिक्षार्थी देवो भव का अपने सभी क्षेत्रीय केंद्रों को पालन करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि राज्यपाल, उत्तर प्रदेश की एडीसी ने भी मुक्त विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर कार्यक्रम में अपना नामांकन कराया है। दूरस्थ शिक्षा कामकाजी लोगों को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और व्यक्तिगत विकास के अवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने जागरूकता प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।

विशिष्ट अतिथि एस सी मिश्रा, सेवानिवृत अपर महानिदेशक, दूरदर्शन मुख्यालय, प्रसार भारती ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा आजीवन सीखने को बढ़ावा देती है, जो आज की तेजी से विकसित हो रही डिजिटल दुनिया में आवश्यक है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों और डिग्री प्रोग्रामों में प्रवेश लेकर व्यक्तित्व का विकास किया जा सकता है।

मुक्त विवि के मीडिया प्रभारी डॉ प्रभात चंद्र मिश्र ने बताया कि इस अवसर पर कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, वित्त अधिकारी पूनम मिश्रा, प्रोफेसर पीके स्टालिन, प्रोफेसर रुचि बाजपेई, प्रोफेसर छत्रसाल सिंह, प्रोफेसर मीरा पाल आदि ने दूरस्थ शिक्षा की महत्ता प्रतिपादित की। दूरस्थ शिक्षा जागरूकता शिविर के नोडल अधिकारी डॉ अनिल कुमार सिंह भदौरिया ने संचालन तथा डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र