इलाज, प्रशिक्षण और शोध एक ही परिसर में, कानपुर में बन रहा देश का दूसरा वाक् एवं श्रवण संस्थान
कानपुर, 02 मई (हि.स.)। बोलने और सुनने से जुड़ी समस्याओं के उपचार, विशेष शिक्षा और शोध के क्षेत्र में कानपुर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। सुरार क्षेत्र में बन रहा यह संस्थान एक सौ अस्सी करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। यह देश का दूसरा तथा उत्तर भारत का पहला वाक् एवं श्रवण संस्थान होगा। कार्य की प्रगति और गुणवत्ता को देखते हुए समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए। यह बातें शनिवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कही।
परियोजना लगभग इक्यासी हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित की जा रही है। इस परिसर में एक सौ दो पुरुष और एक सौ दो महिला विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग छात्रावास बनाए जा रहे हैं। जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही चिकित्सीय ब्लॉक और पूर्व-प्राथमिक ब्लॉक का निर्माण तेजी से चल रहा है जिसमें छोटे बच्चों में शुरुआती अवस्था में ही सुनने और बोलने से जुड़ी समस्याओं की पहचान और उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
इस परियोजना का निर्माण केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एनपीसीसी लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है जबकि गुणवत्ता की तकनीकी निगरानी आईआईटी बीएचयू वाराणसी के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है। संस्थान में अत्याधुनिक ऑडियोलॉजी प्रयोगशालाएं वाक् चिकित्सा कक्ष श्रवण परीक्षण इकाइयां विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए प्रारम्भिक हस्तक्षेप सेवाएं तथा प्रशिक्षण और शोध के उन्नत संसाधन उपलब्ध होंगे जिससे मरीजों को उच्च स्तरीय जांच और उपचार की सुविधा मिलेगी।
परियोजना के पूर्ण होने के बाद कानपुर सहित पूरे उत्तर भारत के मरीजों और विद्यार्थियों को इन सुविधाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर ही आधुनिक उपचार और प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा। इस केंद्र के शुरू होने से उत्तर भारत में वाक् एवं श्रवण संबंधी बीमारियों के उपचार और विशेष शिक्षा के क्षेत्र में एक नई व्यवस्था विकसित होगी।
स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को बड़े शहरों या मैसूर जाने की आवश्यकता कम होगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और अधिक सुलभ बनेगी। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार परियोजना को 31 अक्टूबर तक पूर्ण करने की समयसीमा तय की गई है और कार्य की नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो। यह परियोजना क्षेत्र के स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों ने इसे अहम बताया है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

