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विधायिका और जनता के बीच जितना मजबूत होगा संवाद उतना ही अधिक जीवंत होगा लोकतंत्र : सतीश महाना

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विधायिका और जनता के बीच जितना मजबूत होगा संवाद उतना ही अधिक जीवंत होगा लोकतंत्र : सतीश महाना


लखनऊ/केपटाउन, 16 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) के अंतरराष्ट्रीय मंच पर आयोजित कार्यशाला में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बनाए गए कानूनों के प्रभाव और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा एवं निगरानी की प्रभावी व्यवस्था भी होनी चाहिए।

महाना ने कहा कि बदलती तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप संसदीय व्यवस्थाओं में भी आवश्यक परिवर्तन किए जाने चाहिए। डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने की आवश्यकता है, जो विधायिका को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बना सकें।

उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। महाना ने कहा कि विधायिका और जनता के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, लोकतंत्र उतना ही अधिक जीवंत और सहभागी बनेगा। उन्होंने भारत में लोकतंत्र की जीवंत परंपरा और जनता की व्यापक भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि संसदीय संस्थाओं को समय के साथ स्वयं को निरंतर विकसित करना चाहिए।

उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपनाई जा रही नई संसदीय व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया। कहा विधायिका को अधिक जनहितैषी, जनसुलभ और जनता से जुड़ी संस्था बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

महाना द्वारा कार्यशाला में उठाए गए इन महत्वपूर्ण विषयों और उत्तर प्रदेश विधानसभा में किए जा रहे नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंच पर उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा सराहा गया।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन