home page

पंचामृत योजना’ से वैश्विक मंच तक पहुंचेगा संत कबीर का दर्शन, डीडीयू विश्वविद्यालय में शोध विकास समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

 | 
पंचामृत योजना’ से वैश्विक मंच तक पहुंचेगा संत कबीर का दर्शन, डीडीयू विश्वविद्यालय में शोध विकास समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न


गोरखपुर, 07 मई (हि.स.)।‘दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में संत कबीर के विचारों और मानवतावादी दर्शन को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए संत कबीर अकादमी की शोध विकास समिति की बैठक आयोजित की गई। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय सभागार में संपन्न हुई इस बैठक में अकादमी के निदेशक अतुल द्विवेदी सहित विभिन्न विभागों के विद्वान एवं विशेषज्ञ सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक में संत कबीर के समरसता, मानवता और सामाजिक चेतना से जुड़े विचारों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘पंचामृत योजना’ के अंतर्गत विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि कबीर के विचार आज भी समाज को दिशा देने वाले हैं और इन्हें नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कबीर दर्शन पर गंभीर एवं गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने के लिए 08 शोधार्थियों को फेलोशिप प्रदान की जाएगी, जिसमें 04 जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) और 04 सीनियर रिसर्च फेलो (SRF) शामिल होंगे। इससे कबीर साहित्य, दर्शन और सामाजिक चेतना पर गहन अध्ययन को नई गति मिलेगी।

इसके साथ ही अकादमी की शोध पत्रिका का नाम ‘कबीर पंचामृत’ रखने पर सहमति बनी। यह त्रैमासिक शोध पत्रिका होगी, जिसमें कबीर दर्शन, भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामाजिक समरसता से जुड़े शोध आलेख प्रकाशित किए जाएंगे।

बैठक में मगहर से वाराणसी तक ‘कबीर परिपथ’ के चिन्हांकन का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि संत कबीर से जुड़े ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को एक साझा पहचान मिल सके और शोध एवं पर्यटन की दृष्टि से इसे विकसित किया जा सके।

अकादमिक गतिविधियों को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों को विशेष कार्यशालाओं के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई। संस्कृत विभाग द्वारा ‘नाथपंथ’, इतिहास विभाग द्वारा ‘कबीर दर्शन’ तथा ललित कला विभाग द्वारा कबीर के जीवन और विचारों पर आधारित विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने निर्देश दिया कि कबीर के विचारों को केवल विश्वविद्यालय तक सीमित न रखकर विद्यालयों से भी जोड़ा जाए, ताकि बच्चों में मानवता, समरसता और सामाजिक सौहार्द के मूल्यों का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि संत कबीर के विचार आज के समय में सामाजिक एकता और नैतिक चेतना के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।

बैठक में विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं कलाकार शेखर सेन के विशेष कार्यक्रम के आयोजन का प्रस्ताव भी रखा गया, जिससे विद्यार्थियों और समाज को भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया जा सके।

इस अवसर पर प्रो. मनोज कुमार तिवारी, डॉ. देवेन्द्र पाल, प्रो. ऊषा सिंह, प्रो. अनुराग द्विवेदी, प्रो. विमलेश कुमार मिश्र सहित अन्य विद्वानों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए तथा कबीर दर्शन के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक को विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और संत साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय