आरपीआई (आ.) ने निकाला पैदल मार्च, बाबा साहेब के अस्थि-कलश और ऐतिहासिक धरोहरों को यथास्थान रहने की उठाई मांग
लखनऊ, 30 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधान सभा मार्ग स्थित भारतरत्न बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर महासभा परिसर की ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहरों के संरक्षण और वहाँ स्थापित पावन 'अस्थि-कलश' के संभावित स्थानांतरण के विरोध में मंगलवार को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) की ओर से कार्यकर्ताओं का शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला गया।
यह पैदल मार्च हजरतगंज स्थित अटल चौक (अंबेडकर प्रतिमा) से शुरू होकर विधानसभा मार्ग पर स्थित बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर महासभा तक जाना था, लेकिन जैसे ही उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता के नेतृत्व में पार्टी के पदाधिकारियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं का हुजूम आगे बढ़ा, भारी पुलिस बल ने मार्च को बीच में ही रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस प्रशासन के बीच काफी तीखी गहमागहमी देखी गई। मौके पर ही एसीपी का घेराव कर जमकर नारेबाजी की तथा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आज रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आ.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री डॉ. रामदास अठावले के दिशा-निर्देशन में एक विशाल व शांतिपूर्ण पैदल मार्च का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से संदेश देते कि, प्रशासन लाठी और पुलिस के दम पर हमारी आवाज को नहीं दबा सकता। 10, विधान सभा मार्ग का यह पावन परिसर मात्र एक भूमि का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह बाबा साहेब के अनुयायियों के लिए एक जीवित तीर्थस्थल और अगाध श्रद्धा का केंद्र है। पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा।
पवन भाई गुप्ता ने कहा कि इस परिसर में 14 अप्रैल 1991 को बाबा साहेब की धर्मपत्नी डॉ. सविता अम्बेडकर द्वारा अस्थि-कलश स्थापित किया गया था। इसके साथ ही, पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन द्वारा रोपित 33 वर्ष पुराना ऐतिहासिक आनंद बोधिवृक्ष, पूज्य भंते प्रज्ञानंद महाथेरो द्वारा स्थापित बौद्ध विहार और 12 फीट ऊँची भव्य कांस्य प्रतिमा इस स्थल की अलौकिक पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि गत 14 अप्रैल 2026 को सामने आए बयानों से ऐसी सूचनाएं आ रही हैं कि इस ऐतिहासिक स्थल से बाबा साहेब के पवित्र अस्थि-कलश को ऐशबाग स्थित नए सांस्कृतिक स्थल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। दुःख और आक्रोश की बात यह है कि ऐशबाग परिसर की जो भौगोलिक रूपरेखा सामने आ रही है, उसमें शौचालयों के समीप अस्थि-कलश स्थल बनाने की सुगबुगाहट है। इससे देश-प्रदेश के करोड़ों तथागत बुद्ध और बाबा साहेब के अनुयायियों की भावनाओं को गहरा आघात लगा है।
छेड़छाड़ हुई तो मूकदर्शक नहीं बैठेगा दल
पवन भाई गुप्ता ने कहा कि सरकार को पूरी गंभीरता के साथ अवगत कराते कि, यदि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पावन 'अस्थि-कलश' अथवा इस परिसर की किसी भी ऐतिहासिक धरोहर के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ या छेड़छाड़ की गई, तो रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के हजारों समर्पित कार्यकर्ता और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को मानने वाले लाखों अनुयायी मूकदर्शक बनकर कतई नहीं बैठेंगे। यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।
उन्होंने अंत में कहा कि मुख्यमंत्री से दृढ़ आग्रह किया कि सरकार इस बेहद संवेदनशील विषय पर अपना रुख तुरंत स्पष्ट करे और इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण का तत्काल लिखित आदेश जारी कर समाज में फैल रहे आक्रोश को शांत करे।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

