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राज हवेली में सजा राजदरबार, 1778 से चली आ रही परंपरा आज भी कायम

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राज हवेली में सजा राजदरबार, 1778 से चली आ रही परंपरा आज भी कायम


राज हवेली में सजा राजदरबार, 1778 से चली आ रही परंपरा आज भी कायम


राज हवेली में सजा राजदरबार, 1778 से चली आ रही परंपरा आज भी कायम








जौनपुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। विजयदशमी के अवसर पर जौनपुर की ऐतिहासिक राज हवेली में मंगलवार को पारंपरिक शस्त्र पूजन के बाद राजदरबार लगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जौनपुर रियासत के 12वें नरेश कुंवर अवनींद्र दत्त ने राज पुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र के सानिध्य में विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया। इसके बाद राजदरबार में शहर के व्यापारी, ठिकानेदार, राज वैद्य, हकीम और अन्य गणमान्य लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। इस दौरान लोगों ने राजा की नजर उतारी।

राज हवेली में शस्त्र पूजन और राजदरबार की परंपरा की शुरुआत राजा शिवलाल दत्त ने वर्ष 1778 में की थी। तब से विजयदशमी पर यह परंपरा निरंतर निभाई जा रही है। इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

राजदरबार के बारे में जानकारी देते हुए हवेली के प्रतिनिधि एवं राज डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य कैप्टन डॉ. अखिलेश्वर शुक्ला ने बताया कि रानी तिलक कुंवर ने वर्ष 1848 में पोखरे पर विजयदशमी मेले की शुरुआत की थी। यह मेला आज भी परंपरागत रूप से आयोजित होता है।

राजदरबार के बाद पोखरा स्थल पर राजा ने रावण दहन किया। इसे देखने के लिए गांव-देहात से बड़ी संख्या में लोग जुटे। रावण दहन के बाद राजा ने शमी पूजन किया और फिर राज हवेली लौट आए। इसके साथ ही विजयदशमी के पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

राज हवेली में आज भी निभाई जा रही यह परंपरा जौनपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की पहचान बनी हुई है।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव