स्वाधीनता संग्राम में नारी शक्ति की भूमिका आज भी प्रेरणास्रोत : डॉ. तनुजा भट्ट
कानपुर, 18 जून (हि.स.)। भारत की स्वतंत्रता का इतिहास देश की वीर नारियों के साहस, त्याग और संघर्ष से जुड़ा हुआ है। रानी लक्ष्मीबाई जैसी अमर वीरांगनाओं ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श स्थापित किया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। यह बातें गुरुवार को शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. तनुजा भट्ट ने कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा अमर शहीद स्वाधीनता संग्राम सेनानी रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर “स्वाधीनता संग्राम में नारी शक्ति” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
डॉ. एस.सी. पटेल ने कहा कि आधुनिक महिलाएं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने अभिभावकों से बेटियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का आह्वान किया। शोधार्थी सुशील कुमार ने रानी लक्ष्मीबाई पर स्वलिखित कविता का पाठ किया, जबकि शोधार्थी शिल्पा यादव ने उनके बलिदान और वीरता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंत में संयोजिका डॉ. रत्नर्त्तुः मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन अंजुली ने किया। इस अवसर पर डॉ. कल्पना अग्निहोत्री, डॉ. के.के. चौहान, प्रिया तिवारी, डॉ. आर.पी. सैनी, डॉ. अनुपमा यादव सहित विभाग के सभी शिक्षक उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

