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बाबा साहेब संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के बड़े प्रहरी थे : डॉ. रामाशीष राय

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बाबा साहेब संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के बड़े प्रहरी थे : डॉ. रामाशीष राय


रालोद ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित किया कार्यक्रम

लखनऊ, 13 अप्रैल (हि.स.)। भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या के अवसर पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश कार्यालय, लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय की अध्यक्षता में एक गरिमामयी जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित पार्टी नेतागण एवं कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को स्मरण किया।

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के सबसे बड़े प्रहरी थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन को समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।

डॉ. राय ने कहा कि आज के समय में बाबा साहेब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, जब समाज में असमानता और भेदभाव की चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक समरसता, समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केवल जयंती मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि बाबा साहेब के “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” के मूलमंत्र को अपने जीवन में उतारें और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय दिलाने के लिए कार्य करें।

राष्ट्रीय महासचिव अनिल दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि आज देश के युवाओं को बाबा साहेब के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जो संविधान हमें दिया है, वह केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है, जिसमें हर नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों का समावेश है। उन्होंने कहा कि रालोद हमेशा संविधान की मूल भावना की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा और समाज के हर वर्ग को उसका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गांव-गांव जाकर बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं और सामाजिक समरसता को मजबूत करें।

राष्ट्रीय सचिव विजय श्रीवास्तव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहेब का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी यदि संकल्प मजबूत हो तो सफलता निश्चित है। उन्होंने कहा कि हमें उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम हैदर ने कहा कि बाबा साहेब ने सभी वर्गों को समान अधिकार दिलाने का जो कार्य किया, वह सदैव प्रेरणादायी रहेगा। उन्होंने कहा कि हमें उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए एक समरस समाज के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

प्रदेश मीडिया प्रभारी मयंक त्रिवेदी ने सभी अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का समापन किया।सभी ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को स्मरण किया।

इस अवसर पर प्रदेश महासचिव रामवती तिवारी, प्रीति श्रीवास्तव, चंद्रकांत अवस्थी, राघवेंद्र सिंह यदुवंशी, प्रदेश सचिव प्रमोद शुक्ला, क्षेत्रीय अध्यक्ष पी. के. पाठक, जिलाध्यक्ष सत्य प्रकाश तिवारी, अनीता यादव सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। गोष्ठी का संचालन प्रदेश मीडिया प्रभारी मयंक त्रिवेदी ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा