ग्रेट अंडमानी समुदाय के सशक्तीकरण पर शोध करेंगे इविवि के डॉ खिरोद चंद्र मोहाराणा
--आईसीएसएसआर की ओर से शोध परियोजना के तहत मिला 20 लाख का अनुदान
प्रयागराज, 25 फरवरी (हि.स)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभाग के खाते में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। विभाग के सहायक आचार्य डॉ. खिरोद चंद्र मोहाराणा को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली की ओर से एक मेजर शोध परियोजना प्रदान की गई है।
यह जानकारी इविवि की पीआरओ प्रो जया कपूर ने बुधवार को देते हुए बताया कि “Multispecies Entanglementsand Sustainable Livelihood Design among the
Great Andamanese of Andaman Islands” शीर्षक से स्वीकृत यह परियोजना अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में ग्रेट अंडमानी समुदाय के सतत आजीविका विकल्पों और सशक्तिकरण की सम्भावनाओं पर केंद्रित होगी। इसके लिए आईसीएसएसआर की ओर से 20 लाख का अनुदान प्रदान किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस शोध का उद्देश्य मानव और गैर-मानव प्रजातियों के पारस्परिक सम्बंधों को समझते हुए स्थानीय पारिस्थितिकी, संस्कृति और जीवन निर्वाह के नए मॉडल विकसित करना है। परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रकार्य अध्ययन, सहभागी अवलोकन तथा नीति-निर्माण से जुड़े पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे जनजातीय समुदायों के सतत विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
डॉ. मोहाराणा ने कहा कि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव की प्रेरणा और मार्गदर्शन, शोध कार्यों के प्रति उनकी गंभीरता एवं विश्वविद्यालय में उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए सकारात्मक माहौल से ही यह उपलब्धि संभव हो सकी है।
विभागाध्यक्ष प्रो. राहुल पटेल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल मानवविज्ञान विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि सुदूर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीपों में जनजातीय आजीविका और पर्यावरणीय संतुलन पर महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध होगी। स्थानीय शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भी इस सफलता को विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण बताया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

