ग्लूकोमा से बचाव के लिए नियमित नेत्र जांच जरूरी: डॉ. अनुराग मेहरोत्रा
कानपुर, 09 मार्च (हि.स.)। ग्लूकोमा (काला मोतिया) आंखों की एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे दृष्टि को प्रभावित करती है और समय पर पहचान न होने पर अंधता का कारण भी बन सकती है। इसलिए लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए और इस बीमारी के प्रति जागरूक रहना चाहिए। यह बातें सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कहीं।
आईएमए कानपुर शाखा द्वारा परेड स्थित “टेम्पल ऑफ सर्विस” कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रेस वार्ता की गई। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 12 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व ग्लूकोमा दिवस तथा 10 से 16 मार्च तक मनाए जाने वाले वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक के सम्बंध में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में आईएमए के पदाधिकारियों और नेत्र रोग विशेषज्ञों ने ग्लूकोमा के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आईएमए की सचिव प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि इस वर्ष वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक की थीम “यूनाइटिंग फॉर अ ग्लूकोमा फ्री वर्ल्ड” रखी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्लूकोमा सोसाइटी और आईएमए के माध्यम से पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोग समय रहते अपनी आंखों की जांच करा सकें।
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ और कनिका हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. शरद बाजपेयी ने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थायरॉइड जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों और लम्बे समय तक स्टेरॉयड लेने वालों में ग्लूकोमा का खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए।
रामा मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिका अग्रवाल ने बताया कि ग्लूकोमा कई बार पारिवारिक भी होता है, इसलिए यदि परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी है तो अन्य सदस्यों को भी अपनी आंखों की जांच अवश्य करानी चाहिए।
आईएमए के वैज्ञानिक सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लूकोमा आज भी अंधता के प्रमुख कारणों में से एक है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर नेत्र परीक्षण और जागरूकता बेहद जरूरी है। प्रेस वार्ता में आईएमए के पदाधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे नियमित नेत्र जांच कराकर इस बीमारी के प्रति सजग रहें।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

