भगवा ध्वज जीवन-मृत्यु दोनों का देता है संकेत : संजय हर्ष मिश्र
लखनऊ, 27 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित राष्ट्रधर्म कार्यालय में साेमवार काे आयोजित पुस्तक चर्चा कार्यक्रम में इतिहास संकलन योजना के अखिल भारतीय सह संगठन सचिव संजय हर्ष मिश्र ने कई महत्वपूर्ण, उपयोगी जानकारियां दी। कार्यक्रम में भगवा ध्वज पुस्तक पर चर्चा की गयी, जिसके लेखक नारायण हरि पालकर हैं।
उन्हाेंने बताया कि ध्वज आठ प्रकार के होते हैं। ध्वज के महत्व, उपयोग की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रायः इनका उपयोग युद्ध में होता था। ध्वज राज्य का होता था, जबकि सेनापति की पताका होती थी। मिश्र ने स्वामी रामतीर्थ का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी जी कहते थे कि भगवा ध्वज जीवन-मृत्यु दोनों का ही संकेत देता है। भगवा ध्वज इस बात का संकेत देता है कि यह शरीर अन्त में मिट्टी में मिल जायेगा। महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज का ध्वज भगवा ही था।
उन्हाेंने कहा कि भारत में सात लोगों की झण्डा समिति बनायी गयी थी, जिसने केसरिया ध्वज को अपनाने का सुझाव दिया था। समिति का कहना था कि यह स्वतंत्र और अपना लगता है। हालांकि बाद में महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के बाद तिरंगा को ही अपनाया गया।
इस चर्चा में राष्ट्रधर्म के प्रभारी निदेशक सर्वेश चन्द्र द्विवेदी, निदेशक डॉ. ओमप्रकाश, जय प्रकाश पाण्डेय, के.के. वास, अमित कुशवाहा, डॉ. संतोष कुमार तिवारी, डॉ. ए.पी. पाण्डेय, बाबूलाल शर्मा व अन्य लोग उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह

