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रामायण की प्रासंगिकता किसी एक काल तक सीमित नहीं, हर युग, हर काल में प्रासंगिक : अश्विनी चौबे

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रामायण की प्रासंगिकता किसी एक काल तक सीमित नहीं, हर युग, हर काल में प्रासंगिक : अश्विनी चौबे


बीएचयू में 28 विभूतियों को मिला ‘रामायणी सम्मान’, सम्मान को हर जिले तक पहुंचाने का संकल्प

वाराणसी, 19 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर बुधवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में 28 विभूतियों को ‘रामायणी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र के सहयोग से मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के सभागार में आयोजित समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, संतों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। समारोह में ‘रामायणी सम्मान’ को अभियान के रूप में देश के प्रत्येक जिले तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

—रामायण हर युग में प्रासंगिक: अश्विनी चौबे

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की धरती काशी और गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन जयंती से ‘रामायणी सम्मान’ की शुरुआत होना एक असाधारण पहल है। उन्होंने कहा कि वे देशभर में इस मुहिम को आगे बढ़ाने और प्रत्येक जिले से रामायण, भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रहित के क्षेत्र में कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित कर समाज के सामने लाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि रामायण की प्रासंगिकता किसी एक काल तक नहीं सीमित हो सकती, यह हर युग, हर काल में प्रासंगिक और मानवता का पथ प्रदर्शक है।

—हर जिले तक पहुंचेगा ‘रामायणी सम्मान’ अभियान

नैनीताल-उधमसिंह नगर, उत्तराखंड के सांसद एवं रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि ‘रामायणी सम्मान’ को देशव्यापी अभियान के रूप में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में अनेक प्रतिभाएं रामायण साहित्य, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रहित के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। ऐसी प्रतिभाओं को समाज के सामने प्रेरणादायी आदर्श के रूप में लाना और उन्हें सम्मानित कर प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके।

—युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की जरूरत

छत्तीसगढ़ के सरगुजा से सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि सकारात्मक कार्य करने वालों को निरंतर प्रोत्साहन देना समय की आवश्यकता है। युवाओं और आने वाली पीढ़ी को उचित दिशा देने के लिए समाज में प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को सामने लाना जरूरी है। उन्होंने अपने प्रदेश में भी ‘रामायणी सम्मान’ आयोजित करने के लिए हरसंभव पहल करने की बात कही।

—मनुष्यता की रक्षा का संदेश देती है रामायणकनखल, हरिद्वार स्थित महर्षि योग आश्रम के संस्थापक महर्षि योगी मधुसूदन ने कहा कि रामायण और रामचरितमानस मनुष्य बनने तथा मनुष्यता की रक्षा करने का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचा है और लोगों ने इसे भारत के महत्वपूर्ण तत्त्वग्रंथ के रूप में स्वीकार करते हुए इससे जीवन के आदर्श और प्रेरणा ग्रहण की है।

—अनूप जलोटा के भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल

‘रामायणी सम्मान’ से सम्मानित भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा ने ‘ऐसी लागी लगन’ समेत कई भजनों की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति से सभागार भक्तिमय हो उठा। उन्होंने कहा कि आज वे जो कुछ भी हैं, संतों की कृपा से हैं। संत उनके भजन सुनते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

—बीएचयू के लिए गौरव का विषय: कुलपति

समारोह की अध्यक्षता कर रहे बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित चतुर्वेदी ने कहा कि ‘रामायणी सम्मान’ का आयोजन विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने रामायण रिसर्च काउंसिल की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को रामायण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

—भारतीय संस्कृति और सामाजिक जागरण को बढ़ावा देना उद्देश्य

काउंसिल के ट्रस्टी एवं ‘रामायणी सम्मान’ के संयोजक देवदत्त शर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस, ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध, रामकथा, संगीत और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में रामायण से प्रेरित उत्कृष्ट योगदान करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है। काउंसिल की प्रभारी एवं आध्यात्मिक गुरु साध्वी प्रज्ञा भारती ने सीतामढ़ी में मां सीता की श्रीभगवती स्वरूप में स्थापना के संकल्प की जानकारी दी। उन्होंने देशभर की मातृशक्ति से मां सीता के लिए एकजुट होने की अपील की। साथ ही सभागार में मौजूद लोगों को सीतामढ़ी में मां सीता की महालक्ष्मी स्वरूप में स्थापना के लिए सहयोग का संकल्प दिलाया।

—काउंसिल की विभिन्न पहलों का उल्लेख

अजय भट्ट ने रामायण रिसर्च काउंसिल की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना काल में प्रभु श्रीराम के मानव कल्याण के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से देशभर में डिजिटल रामलीला का मंचन कराया गया। अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर के संघर्ष पर आधारित 1250 पृष्ठों के ग्रंथ ‘श्रीरामलला—मन से मंदिर तक’ का भी निर्माण कराया गया है।

उन्होंने बताया कि देवभाषा संस्कृत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का लगातार प्रकाशन किया जा रहा है। काउंसिल ने 51 शक्तिपीठों से मिट्टी और ज्योत लाकर अखंड ज्योत की स्थापना के साथ चतुर्भुजा महालक्ष्मी की स्थापना का भी संकल्प लिया है।

—समारोह को इन लोगों ने भी किया संबोधित

कार्यक्रम को बीएचयू कला संकाय की डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. हरिहर कृपालु त्रिपाठी, ज्योतिषाचार्य प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय और जानकी कथावाचक बालव्यास वैदेहीनंदन ने भी संबोधित किया। बीएचयू भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि देवदत्त शर्मा ने आभार जताया।

कार्यक्रम में वाराणसी जोन के एडीजी पुलिस नवीन अरोड़ा, काउंसिल के ट्रस्टी एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भरत नागर, सीतामढ़ी के जिला संगठन प्रभारी नीरज गोयनका, श्रीरामजानकी मठ जीर्णोद्धार समिति के प्रभारी विजय कुमार, सीता सखी समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अंजना प्रकाश, सोनिया सिन्हा, सुषमा अग्रवाल, सीए राकेश सिंह और विनोद शर्मा सहित अन्य विशिष्टजन मौजूद रहे।

—इन 28 विभूतियों को मिला ‘रामायणी सम्मान’

अनूप जलोटा (भजन सम्राट), अनुराधा पौडवाल (मुंबई), आर.के. सिन्हा (बिहार), किशोर कुणाल (पटना, मरणोपरांत), डॉ. अर्चना प्रकाश (लखनऊ), भगवान दास (नई दिल्ली), डॉ. उदय प्रताप सिंह (वाराणसी), डॉ. अवधी हरि (लखनऊ), योगेश्वर प्रसाद देवरानी (नैनीताल), आदित्य जैन (नीमच, मध्य प्रदेश), अभय माणके (इंदौर), संत हरिओम (हाथरस), नरेंद्रनाथ गगन (बिहार), योगेश चंद्र शर्मा योगी (आगरा), संजीव कुमार (बिहार), डॉ. आशा ओझा (बिहार), मद्गुल्ला प्रफुल्ला (आंध्र प्रदेश), विनोद कुमार तिवारी (झारखंड), डॉ. चंद्र प्रभा मदान (हरियाणा), आचार्य संतोष पांडेय (राजस्थान), अजय याग्निक (दिल्ली), विंध्याचल मणि त्रिपाठी (उत्तर प्रदेश), राजराधे कृष्ण शर्मा (महाराष्ट्र), प्रेम प्रकाश दुबे (महाराष्ट्र), त्रिलोकी नाथ पांडेय (उत्तर प्रदेश), रामधनी द्विवेदी (उत्तर प्रदेश), डॉ. रविशंकर पांडेय (उत्तर प्रदेश) एवं रेखा मेहरा (नई दिल्ली) को ‘रामायणी सम्मान’ प्रदान किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी