सद्गुणों की रक्षा ही सच्ची साधना, राम के आदर्शों से मिलती है जीवन की दिशा : विजय कौशल महाराज
कानपुर, 29 मार्च (हि.स)। जीवन में सद्गुणों की रक्षा करना ही सच्ची साधना है, इसलिए भेष, भोजन और भाषा का सदैव ध्यान रखना चाहिए। भगवान राम के चरित्र से हमें मर्यादा, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। सीता स्वयंवर और धनुष यज्ञ का प्रसंग हमें संयम, श्रद्धा और आस्था का संदेश देता है। ऐसे प्रसंगों के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है। यह बातें रविवार को विजय कौशल महाराज ने कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित श्री हनुमान कथा के अष्टम दिवस श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के बीच अत्यंत भक्तिमय वातावरण में कथा का विश्राम हुआ। कथा के अंतिम दिन पूज्य विजय कौशल महाराज ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि पुष्प वाटिका में जब भगवान राम और लक्ष्मण पुष्प लेने पहुंचे, उसी समय माता सीता गौरी पूजन के लिए वहां आईं, जहां सीता जी ने पहली बार भगवान राम का दर्शन किया। जानकी जी ने पूर्ण श्रद्धा के साथ गौरी माता की आराधना कर अपने मन की भावना व्यक्त की। वहीं राम और लक्ष्मण ने भी लौटकर गुरु विश्वामित्र को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।
धनुष यज्ञ का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि भगवान राम ने गुरु, माता-पिता, भगवान शंकर, राजा जनक और धनुष को प्रणाम कर चाप चढ़ाया और धनुष भंग कर दिया। धनुष भंग होते ही परशुराम जी क्रोधित होकर यज्ञ मंडप में पहुंचे, लेकिन प्रभु राम के पूर्ण अवतार स्वरूप को जानकर शांत हो गए और उन्हें प्रणाम किया।
इसके उपरांत जनक जी द्वारा राजा दशरथ को बारात का आमंत्रण दिया गया, जिस पर अयोध्या से भव्य बारात जनकपुर पहुंची और भगवान राम सहित उनके तीनों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ। इसी के साथ कथा का विधिवत विश्राम हुआ।
कार्यक्रम में सतीश गौतम (सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी), राजीव पांडेय, डॉ. उमेश पालीवाल, डॉ. विवेक द्विवेदी, अजय पचौरी, उमेश निगम, डॉ. सुनील सिंह, रविंद्र पालीवाल, आनंद निगम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

