यूपी बोर्ड ने माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता के नियमों में किया संशोधन, आवेदन प्रक्रिया हुई और सरल
प्रयागराज, 27 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों के लिए मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाया गया है। इसके साथ ही भूमि संबंधी मानकों में लचीलापन दिया गया है तथा मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल पूरे वर्ष खुला रखने का निर्णय लिया गया है। यह जानकारी सोमवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार अब विद्यालय मान्यता के लिए वर्षभर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यदि कोई विद्यालय 31 मई तक निर्धारित मानकों और सभी औपचारिकताओं को पूरा कर आवेदन करता है, तो उसके आवेदन पर अगले शैक्षिक सत्र के लिए विचार किया जाएगा। 31 मई के बाद आवेदन करने वाले विद्यालयों को अगले वर्ष के सत्र के लिए मान्यता पर विचार किया जाएगा।
परिषद ने मान्यता के लिए आवश्यक भूमि संबंधी नियमों में भी संशोधन किया है। विद्यालय परिसर और खेल मैदान के लिए निर्धारित मानकों में व्यवहारिक लचीलापन दिया गया है। साथ ही खेल सुविधाओं में एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, लॉन टेनिस, ओपन जिम और आउटडोर खेलों के साथ इनडोर खेलों तथा शारीरिक सौष्ठव की व्यवस्था को भी शामिल किया गया है।
संशोधित नियमों के तहत अब केवल सोसायटी, ट्रस्ट या कंपनी ही नहीं, बल्कि सांविधिक निकाय, स्वायत्तशासी निकाय, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकाय भी विद्यालय संचालित कर सकेंगे। इसके लिए विद्यालय संचालन योजना, प्रबंधन समिति के गठन और आवश्यक दस्तावेजों की स्पष्ट व्यवस्था निर्धारित की गई है।
इसके अलावा विद्यालयों की भूमि, भवन, लीज, पंजीकरण, संचालन योजना, निरीक्षण प्रक्रिया और आवश्यक अभिलेखों से जुड़े कई प्रावधानों को भी अधिक स्पष्ट और सरल बनाया गया है, जिससे विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने में सुविधा होगी।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुरूप परिषद के मान्यता संबंधी नियमों में संशोधन किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य विद्यालयों के लिए मान्यता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन आवेदन की वर्षभर उपलब्ध सुविधा और नियमों में किए गए व्यावहारिक संशोधनों से विद्यालयों को काफी सहूलियत मिलेगी, वहीं शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

