वित्तविहीन विद्यालयों को बड़ी राहत, मान्यता के नियम हुए सरल; ऑनलाइन आवेदन अब पूरे वर्ष
प्रयागराज, 22 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश शासन और माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश में शिक्षा के विस्तार तथा वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से परिषद के विनियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। परिषद सचिव भगवती सिंह ने बुधवार को बताया कि नए प्रावधानों से विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने में काफी सुविधा मिलेगी।
उत्तर प्रदेश शासन एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के लिए परिषद के विनियम (अध्याय-7) में व्यापक संशोधन एवं शिथिलीकरण लागू किया है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि संशोधित नियमों का उद्देश्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विस्तार करना और विद्यालयों को मान्यता संबंधी प्रक्रिया में अधिक सुविधा उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था के तहत शहरी क्षेत्रों में विद्यालयों के लिए न्यूनतम 3000 वर्गमीटर भूमि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 6000 वर्गमीटर भूमि का प्रावधान किया गया है। शहरी विद्यालयों के लिए निर्धारित 1000 वर्गमीटर क्रीड़ास्थल विद्यालय परिसर से अधिकतम 200 मीटर की दूरी पर भी स्थित हो सकेगा, जिससे भूमि संबंधी व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान होगा।
परिषद ने पहले से संचालित विद्यालयों को भी बड़ी राहत दी है। 26 दिसंबर 2022 से पूर्व मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए भूमि संबंधी मानक पूर्व व्यवस्था के अनुसार ही लागू रहेंगे। ऐसे विद्यालयों को इंटरमीडिएट में नए वर्ग या अतिरिक्त विषय की मान्यता के लिए केवल अतिरिक्त कक्षाओं और प्रयोगशालाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
अब आनलाइन करना होगा आवेदन
बोर्ड के सचिव ने बताया कि मान्यता प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल अब पूरे वर्ष खुला रहेगा, जिससे संस्थाएं अपनी सुविधा के अनुसार आवेदन कर सकेंगी।
संशोधित नियमों के तहत अब केवल पंजीकृत समिति, ट्रस्ट या 'नॉट फॉर प्रॉफिट' कंपनियां ही नहीं, बल्कि सांविधिक निकाय, स्वायत्तशासी संस्थाएं, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकाय भी विद्यालयों की मान्यता के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इसके अलावा 30 वर्ष की पंजीकृत लीज डीड पर भी विद्यालयों को मान्यता देने का प्रावधान किया गया है।
मान्यता आवेदन की समय-सीमा और प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। साथ ही पहले लागू 20 हजार रुपये के विलंब शुल्क के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है, जिससे आवेदकों को आर्थिक राहत मिलेगी। जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा आख्या एवं संस्तुति भेजने की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है।
परिषद सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 की धारा 16(2) के तहत संशोधित विनियम लागू कर दिए गए हैं। उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं एवं आवेदकों से परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध संशोधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

