राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की भूमिका में लगातार हो रही वृद्धि : कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत
एनसीसी कैडेट्स ने सैन्य प्रशिक्षण के साथ आधुनिक ड्रोन तकनीक का लिया अनुभव
प्रयागराज, 14 जुलाई (हि.स.)। वर्तमान समय में राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए एनसीसी प्रशिक्षण में इसे शामिल करना समय की आवश्यकता है। उक्त बातें मंगलवार को 15 उत्तर प्रदेश बटालियन एनसीसी द्वारा आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में कैडेट्स को संबोधित करते हुए 15 उत्तर प्रदेश बटालियन एनसीसी की कमांडिंग ऑफिसर कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत ने कहीं।
उन्होंने कहा कि शिविर की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है, जिससे कैडेट्स को पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ आधुनिक तकनीक, शारीरिक फिटनेस और जीवन कौशल का संतुलित प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए एनसीसी प्रशिक्षण में इसे शामिल करना समय की आवश्यकता है।
15 उत्तर प्रदेश बटालियन एनसीसी द्वारा आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (सीएटीसी-69) के दूसरे दिन 660 एनसीसी कैडेट्स ने सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक तथा नेतृत्व विकास से जुड़ी विविध गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर का उद्देश्य कैडेट्स को सैन्य जीवन की कार्यप्रणाली से परिचित कराते हुए उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, तकनीकी दक्षता और जीवनोपयोगी कौशल का विकास करना है।
दिन की शुरुआत प्रातःकालीन शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) से हुई। इसके बाद आयोजित ड्रिल परेड में कैडेट्स ने अनुशासन, समन्वय और टीम भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। नियमित सैन्य अभ्यासों के माध्यम से कैडेट्स की शारीरिक क्षमता और आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।
शिविर का प्रमुख आकर्षण लाइव फायरिंग अभ्यास रहा। जूनियर डिवीजन एवं जूनियर विंग के कैडेट्स ने प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की निगरानी में पहली बार हथियार से फायरिंग का अनुभव प्राप्त किया। इस अभ्यास के दौरान उन्हें हथियारों के सुरक्षित संचालन, सावधानियों तथा निशानेबाजी की मूलभूत तकनीकों की जानकारी दी गई, जिससे उनका आत्मविश्वास और व्यावहारिक ज्ञान दोनों बढ़े।
वहीं सीनियर डिवीजन एवं सीनियर विंग के कैडेट्स के लिए मैप रीडिंग, वेपन ट्रेनिंग, तकनीकी प्रशिक्षण तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विषयों पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से कैडेट्स को सैन्य संचालन, सामरिक तैयारी और दैनिक जीवन में उपयोगी व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया गया।
आधुनिक तकनीक से परिचित कराने के उद्देश्य से कैडेट्स के लिए ड्रोन तकनीक पर विशेष परिचयात्मक सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने ड्रोन की कार्यप्रणाली, विभिन्न क्षेत्रों में उसके उपयोग तथा संचालन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। साथ ही बताया गया कि अगले चरण में कैडेट्स को ड्रोन संचालन का व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे उन्हें आधुनिक तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा।
सायंकाल केंद्रीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। खेल गतिविधियों ने उनमें टीमवर्क, प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना और शारीरिक दक्षता को बढ़ावा दिया। इसके उपरांत 'ऑपरेशन रेड विंग्स' पर आधारित एक प्रशिक्षण फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से कैडेट्स को सैन्य मूल्यों, नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सशस्त्र बलों की कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा से अवगत कराया गया।
रक्षा मंत्रालय, प्रयागराज के जनसंपर्क अधिकारी एवं प्रवक्ता ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने के साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण के साथ आधुनिक तकनीकी ज्ञान का समावेश कैडेट्स को अधिक सक्षम, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शिविर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अनुशासित, दक्ष और आत्मनिर्भर युवाओं के निर्माण में प्रभावी योगदान देगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

