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जाति नहीं सनातन और समाज की एकता की जरूरत : डा. दिनेश शर्मा

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जाति नहीं सनातन और समाज की एकता की जरूरत : डा. दिनेश शर्मा


दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा भारत

लखनऊ, 28 फरवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद डा. दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आक्रान्ताओं ने देश को लूटने का काम किया परन्तु वे देश की संस्कृति और संस्कार को लूट नहीं सके। उन्होंने कहा कि आज के समय में जाति नहीं बल्कि सनातन और समाज की एकता की जरूरत है। आज बडे समय के बाद समाज एकजुट हुआ है। महाकुंभ , माघ मेला , त्योहार ने समाज को एकजुट किया है। अब इसे बिखरने नहीं देना है। पिछले कुछ वर्ष में देश में बडा बदलाव देखने को मिला है।

वह अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की ओर से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शनिवार को आयोजित प्रबुद्ध समागम को संबोधित कर रहे थे।

डा. दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत की संस्कृति और संस्कार को समाज के उस वर्ग ने सुरक्षित किया जो धर्म स्थानों के रक्षण के भाव के साथ ही वेदों का वाचन करता था। मुगलों और अंग्रेजों ने भारत के समाज को जातियों में बांटा जिससे कि सनातन के अनुयायी एकजुट नहीं हो सके। समाज की एकता को तोड़ने के लिए शास्त्रों का पाठ करने वाले शिखा और जनेऊधारियों को सबसे पहले प्रताड़ित किया गया। समाज के इस वर्ग को जिसे ब्राह्मण कहा गया उसने समाज को हर मौके पर जोड़ने का काम किया। विवाह का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मौके पर भी हर वर्ग के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई और समाज को एकजुट किया।

डा. शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण का कार्य परम्पराओं को सहेजना, सनातन व समाज को जोड़ना, देवी देवताओं के सम्मान की रक्षा करना है। देश का सांस्कृतिक गौरव वापस आया है। ये सनातन के जागरण का समय है। महाकुंभ में इसकी झलक दुनिया ने देखी थी। श्री राम जन्मभूमि मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर महाकाल लोक विंध्यवासिनी माता मंदिर क्षेत्र का पुनर्निर्माण नैमिषारण्य से लेकर मथुरा और चित्रकूट धाम तक किए गए विकास ने एक नई सनातन संस्कृति के प्रज्वलन का इतिहास रचा है। उन्होंने कार्यक्रम आयोजन कर्ताओं का सभी जातियों के लोगों के सम्मान के आयोजन के विचार की प्रशंसा की।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन