महिलाओं के लिए थाना न्याय की पहली उम्मीद, पुलिस संवेदनशीलता के साथ करे कार्य : विजया रहाटकर
कानपुर, 09 जुलाई (हि.स.) महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। फिर भी पीड़ित महिला के लिए थाना किसी सरकारी कार्यालय से अधिक न्याय की पहली उम्मीद होता है। ऐसे में पुलिस को नियमों के साथ संवेदनशीलता से काम करना चाहिए, ताकि महिलाओं का विश्वास कभी न टूटे। यह बातें गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहीं।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से सिविल लाइंस स्थित नागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में दो दिवसीय 'एडवांस जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग' कार्यशाला 'शक्ति और सुरक्षा' का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर मुख्य अतिथि तथा उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि रहीं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और डब्ल्यूसीएसए के आईजी सुभाष चंद्र द्विवेदी ने अतिथियों का बुके और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया।
कार्यक्रम के दौरान 'कंपैशनेट कॉप : शक्ति और सुरक्षा' पुस्तक का भी विमोचन किया गया। कार्यशाला में प्रदेश के 17 जिलों से पुलिस अधिकारी और कर्मी शामिल हुए। इससे पहले इस श्रृंखला का पहला आयोजन नौ और 10 जून को गाजियाबाद में किया गया था।
अपने संबोधन में विजया रहाटकर ने कहा कि किसी भी पीड़ित महिला के लिए थाना न्याय पाने की पहली सीढ़ी होता है। ऐसे में पुलिस का व्यवहार अनुशासित, संवेदनशील और भरोसा पैदा करने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग के पास कई बार महिलाओं की शिकायत आती है कि उन्हें थानों में अनावश्यक रूप से बैठाकर रखा जाता है। इस तरह की शिकायतों पर पुलिस को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पति-पत्नी से जुड़े विवादों में पुलिस को धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। हर मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज करने के बजाय, जहां संभव हो, कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रहते हुए विवाद का उचित समाधान कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने में पुलिस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और उन्हें कभी निराश नहीं होना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

