वाराणसी: दुर्दांत नक्सली ब्रजेश गंझू एनआईए की मोस्ट वांटेड लिस्ट में रहा शामिल
—टीएसपीसी का सुप्रीमो था 30 लाख का इनामी बृजेश गंझू, भाकपा माओवादी के समानांतर खड़ा किया था संगठन
वाराणसी,20 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने रविवार को वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में टेंगरा मोड़ के पास मुठभेड़ में 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह को मार गिराया। बृजेश प्रतिबंधित संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) का सुप्रीमो था और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की मोस्ट वांटेड सूची में भी शामिल रहा था।
—वर्ष 2004 में बनाया समानांतर संगठन
एटीएस के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के लुट्टू सोहावन गांव निवासी बृजेश गंझू ने वर्ष 2004 में प्रतिबंधित भाकपा माओवादी के खिलाफ अपना समानांतर संगठन खड़ा किया था। बाद में टीपीसी ने झारखंड के चतरा के अलावा रांची, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू और लातेहार सहित कई इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ाईं। बिहार के कुछ जिलों और उत्तर प्रदेश के बिहार से सटे क्षेत्रों में भी संगठन की सक्रियता बताई गई।
—कारोबारियों और ठेकेदारों से वसूली का आरोप
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बृजेश गंझू झारखंड और बिहार के कारोबारियों तथा ठेकेदारों को धमकाकर कथित तौर पर वसूली करता था। पुलिस की सक्रियता बढ़ने पर वह वाराणसी और आसपास के जिलों, विशेषकर सोनभद्र और चंदौली में ठिकाने बदलकर रहता था। अधिकारियों का दावा है कि पूर्वांचल में कुछ सफेदपोश लोगों से भी उसे मदद मिलती थी।
—टेरर फंडिंग मामले में भी आया था नाम
पुलिस के अनुसार, बृजेश गंझू का नाम टेरर फंडिंग मामले में भी सामने आया था। एनआईए ने वर्ष 2018 में टेरर फंडिंग मामले की जांच शुरू की थी। इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें बृजेश गंझू का नाम भी शामिल बताया गया।
—टीपीसी और भाकपा माओवादी में लंबे समय से संघर्ष
टीपीसी और भाकपा माओवादी के बीच पिछले करीब दो दशकों से कई बार सशस्त्र संघर्ष होने की बात सामने आती रही है। झारखंड के जंगलों और आसपास के गांवों में दोनों संगठनों के बीच हुई हिंसक घटनाओं में उग्रवादियों के साथ ग्रामीणों के भी मारे जाने की खबरें सामने आती रही हैं।
—पूर्वांचल में एटीएस ने बिछाया था नेटवर्क
बृजेश गंझू की गतिविधियों पर यूपी एटीएस की लंबे समय से नजर थी। अधिकारियों के अनुसार, एटीएस ने पूर्वांचल में नक्सली गतिविधियों की निगरानी के लिए अपना नेटवर्क सक्रिय किया था। इसी दौरान बृजेश की लोकेशन का पता चला। इसके बाद एटीएस की टीम ने टेंगरा मोड़ के पास उसे घेर लिया, जहां हुई मुठभेड़ में वह मारा गया।
—झारखंड सरकार ने 25 और एनआईए ने पांच लाख का रखा था इनाम
बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और एनआईए की ओर से पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह उस पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

