home page

नाटक ’देही’ ने उठाए अस्तित्व पर गहरे सवाल, क्या मशीन कभी ’इंसान’ बन पाएगी?

 | 
नाटक ’देही’ ने उठाए अस्तित्व पर गहरे सवाल, क्या मशीन कभी ’इंसान’ बन पाएगी?


प्रयागराज, 17 अप्रैल (हि.स.)। मंच पर पसरा सन्नाटा और हवा में तैरता एक यक्ष प्रश्न - “क्या इंसान सिर्फ एक शरीर है? और अगर मशीन उस शरीर की नकल कर ले, तो क्या वह भी ’इंसान’ कहलाएगी?“ इन्ही रोंगटे खड़े कर देने वाले सवालों के साथ पंजाबी नाटक ’देही’ ने दर्शकों को आत्म-मंथन करने पर मजबूर कर दिया।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी (सांस्कृतिक कार्य विभाग, चंडीगढ़) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बैसाखी महोत्सव के तहत शुक्रवार को डॉ. अमरजीत ग्रेवाल द्वारा लिखित नाटक देही का मंचन सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में राजविदंर समराला के निर्देशन में हुआ। राजविंदर समराला के सधे हुए निर्देशन में इस नाटक ने मानवीय संवेदनाओं और तकनीक के टकराव को बखूबी पेश किया।

नाटक “देही” मानव-देह को केवल शरीर नहीं, बल्कि संवेदनाओं, स्मृतियों, इच्छाओं और मानवीय रिश्तों की जीवित भूमि के रूप में प्रस्तुत करता है। यह सवाल उठाता है कि यदि मशीनें इंसानी बुद्धि का अनुकरण कर सकती हैं, तो क्या वे मानवीय उपस्थिति और भावनाओं को भी पूरी तरह पुनःनिर्मित कर सकती हैं? और अगर देह एक वस्तु बन जाए, तो प्रेम, पहचान और गरिमा का क्या होगा? जहां देह और मशीन, संवेदना और प्रोग्राम, वास्तविकता और कृत्रिमता के बीच संघर्ष चलता है।

कमलजीत कौर, ईशा आहूजा, कोमलप्रीत बंगा, अलका और वंश जांगड़ा ने अपने शानदार अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। प्रकाश व्यवस्था में उदयवीर सिंह और संगीत में वैभव घई का योगदान नाटक को और अधिक प्रभावी बनाता है।

इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि कर्नल सी.एस. मेहता, अध्यक्ष, गुरु तेग बहादुर खालसा गर्ल्स इण्टर कॉलेज प्रयागराज, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, डॉ. मुकेश उपाध्याय (उपनिदेशक, कार्यक्रम) एवं कल्पना सहाय (कार्यक्रम सलाहकार) ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। कार्यक्रम का संचालन आकाश अग्रवाल ने किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र