पतंजलि ऋषिकुल के समर कैंप में बच्चों ने सीखे विज्ञान, कला व कौशल विकास के गुण
प्रयागराज, 20 मई (हि.स)। पतंजलि ऋषिकुल में बच्चों के नैसर्गिक कौतूहल, आधुनिक तकनीकी की आवश्यकताओं के सुंदर ताने-बाने से बुना ‘समर एनरिचमेंट प्रोग्राम’ का भव्य समापन हुआ। इस समर कैंप का आयोजन 11 से 20 मई तक किया गया। यह आयोजन केवल ग्रीष्मकालीन अवकाश को बिताने का साधन नहीं, बल्कि एक ऐसी तकनीकी, मनोविज्ञान और आनन्द से परिपूर्ण ऐसा अनुष्ठान था जहां बच्चों ने अपनी पुस्तकों को परे रखकर अपनी रचनात्मकता के पंख फैलाए।
विद्यालय के प्रधानाचार्य नित्यानंद सिंह ने बताया कि कक्षा 1 और 2 के छात्रों के लिए ‘हैप्पी हॉपर्स’ गतिविधि के तहत कार्डियो, ज़ुम्बा एनिमल्स, साल्सा और कुम्बिया जैसे ऊर्जावान और संगीतमय सत्र आयोजित किए गए। ये सत्र केवल शारीरिक फिटनेस के साधन नहीं, बच्चों की अतिरिक्त शारीरिक ऊर्जा को एक सकारात्मक और कलात्मक दिशा देने का ऐसा प्रयास था। संवाद की झिझक दूर करने के लिए ‘स्पीक फिनिटी’ और ‘वोकाबूम रीडाथॉन’ के माध्यम से एड-एक्ट, मिनी रिपोर्टर और कर्सिव राइटिंग जैसे अनूठे प्रयोग किए गए। ‘कैनवास ऑफ ड्रीम्स’ में क्ले मॉडलिंग और डूडल आर्ट जैसी गतिविधियों ने बच्चों की कोमल कल्पनाओं को साकार रूप दिया। जबकि ‘स्क्रैच जूनियर’ की कोडिंग स्क्रीन पर एआई पोस्टर डिजाइन करते हुए नन्हे बच्चों ने अपने विचारों को डिजिटल रूप दिया।
उन्होंने बताया कि कक्षा 03 से 05 तक के विद्यार्थियों के लिए, जहां जिज्ञासा अपने शीर्ष पर होती है, गतिविधियों को और अधिक तार्किक, व्यावहारिक और कल्पनाशील बनाया गया। विज्ञापन अभिनय और ‘द ग्रैंड एक्सचेंज’ जैसी सामूहिक गतिविधियों ने बच्चों में आपसी सहयोग, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समझ का संचार किया, जो बाल मनोविज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। विज्ञान को कौतूहल और मनोरंजन से जोड़ते हुए यूरेका एक्स्पेडीशन के अंतर्गत जियोबोर्ड, न्यूटन क्रैडल, कैटापुल्ट, थर्मामीटर और वॉटर डिस्पेंसर जैसे प्रोजेक्ट्स ने बच्चों की खोजी प्रवृत्ति और विश्लेषणात्मक सोच को जीवंत कर दिया।
इसी प्रकार कक्षा 06 से 08 के विद्यार्थियों के लिए व्यक्तित्व विकास और अत्याधुनिक विधाओं का एक अद्भुत मंच तैयार किया गया। ‘परसोना पावर लैब’ के तहत कार्यशालाओं ने बच्चों को आत्म खोज, समय प्रबंधन, सॉफ्ट स्किल्स और संवेगात्मक संतुलन के ऐसे सूत्र दिए, जो उनके भीतर एक सुदृढ़ और संतुलित व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। डिजिटल युग की ओर कदम बढ़ाते हुए ‘गेम ग्रिड एरिना’ में बच्चों ने कम्प्यूटर नेटवर्किंग और लैन सर्वर सेटअप के जटिल तकनीकी ज्ञान को खेल-खेल में एक रोमांचक गेमिंग टूर्नामेंट के रूप में सीखा।
प्रधानाचार्य ने बताया कि समापन अवसर पर ‘क्राफ्टी क्रिएशंस क्लब’, ‘यंग इनोवेटर्स हब’ के प्रतिभागियों द्वारा प्रशिक्षण के दौरान तैयार की गयी कलात्मक वस्तुओं, बनाये गये प्रतिरूपों की प्रदर्शनी तथा साथ ही ‘क्लिक क्रॉनिकल्स’ के प्रतिभागियों द्वारा लिए गये छायाचित्रों की भी प्रदर्शनी लगाई गयी। उन्होंने बताया कि सभी प्रतिभागियों में से जिन प्रतिभागियों को संगीत, कला और खेलकूद से जुड़ी गतिविधियों के बारे में पर्याप्त समय लेकर और अधिक गहनता से उन्हें सीखने की इच्छा व्यक्त की थी, उन्हें ध्यान में रखते हुए विद्यालय ने संगीत, कला, शिल्प और खेलकूद के सत्रों को 31 मई तक यथावत चलती रहेंगी।
इस अवसर पर विद्यालय की उपाध्यक्षा डॉ. कृष्णा गुप्ता ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक पहल बताया। कैम्प का उद्देश्य शिक्षा को किताबों से बाहर निकालकर जीवन के व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना था। विद्यालय की निदेशिका रेखा बैद और सचिव यशोवर्धन ने कहा कि कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक तकनीक से लेकर हमारी पारंपरिक लिपन आर्ट और वित्तीय साक्षरता का जो अनूठा संगम देखने को मिला, वह बच्चों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए एक जिम्मेदार और कुशल नागरिक के रूप में तैयार करेगा।
विद्यालय के प्रधानाचार्य नित्यानंद सिंह ने कहा कि समर कैंप के आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में कौशल विकास, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का संवर्धन करना था, ताकि वे केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर जीवनोपयोगी गुणों से भी समृद्ध हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

