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वीरभूमि महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का आयोजन, सिंधी समाज ने साझा किए दर्दनाक अनुभव

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वीरभूमि महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का आयोजन, सिंधी समाज ने साझा किए दर्दनाक अनुभव


वीरभूमि महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का आयोजन, सिंधी समाज ने साझा किए दर्दनाक अनुभव


वीरभूमि महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का आयोजन, सिंधी समाज ने साझा किए दर्दनाक अनुभव


महोबा, 14 अगस्त (हि.स.)।यूपी के महोबा में विभाजन विभीषिका दिवस पर वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय में शुक्रवार को जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद और जिला प्रशासन के तत्वावधान में प्रदर्शनी और संगोष्ठी का आयोजन हुआ। प्रदर्शनी में भारत-पाकिस्तान विभाजन की तस्वीरें और डॉक्यूमेंट्री दिखाई गईं। कार्यक्रम में सिंधी समाज के लोगों ने विभाजन के दर्दनाक अनुभव साझा किए। अधिकारियों द्वारा वरिष्ठजनों को सम्मानित किया गया है।

जनपद मुख्यालय स्थित वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय की घटनाओं पर आधारित चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में बच्चों को उनके अध्यापकों ने विभाजन की पूरी कहानी विस्तार से बताई। इसके अलावा विभाजन पर आधारित फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। इस दौरान भारत सरकार द्वारा तैयार की गई विभाजन पर आधारित सामग्री को एलईडी के माध्यम से छात्रों को दिखाया गया।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने भारत-पाकिस्तान विभाजन के ऐतिहासिक कारणों और उसके प्रभावों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विभाजन से जुड़े परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। सिंधी समाज के वरिष्ठजनों ने विभाजन के समय अपने दर्दनाक अनुभव साझा किए।

इस अवसर पर सेवक सिंधी, घनश्याम मनकानी, राजकुमार बख्तियारपुरी, मनोज कुमार वरयानी, मनोहर नंदवानी, नंदलाल बख्तियारपुरी, घनश्याम नंदवानी, कन्हैया लाल कुकरेजा आदि ने विभाजन से जुड़ी अपनी यादें सुनाईं। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी बलराम कुमार ने विभाजन से जुड़े परिवारों के वरिष्ठ जनों को सम्मानित किया। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक प्रेमचंद यादव, पर्यटन अधिकारी डॉ. चित्रगुप्त श्रीवास्तव, साहित्यकार संतोष पटैरिया सहित महाविद्यालय व जनपद के अन्य विद्यालयों के स्टाफ माैजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र द्विवेदी