मास्टर ट्रेनर तैयार कर रही सरकार, शिक्षिकाओं को देंगे ऑनलाइन प्रशिक्षण
लखनऊ, 13 अगस्त (हि.स.)। बेटियों की शिक्षा किसी जैविक प्रक्रिया के कारण बाधित न हो और विद्यालय उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं संवेदनशील वातावरण का स्थान बने—योगी सरकार इस दिशा में व्यवस्थागत पहल को जमीन तक पहुंचा रही है। इसी क्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े विषयों पर शिक्षकों की समझ और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जनपदों में मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं।
राज्य स्तर पर आयोजित दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 13 अगस्त को 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण पूरा हुआ, जबकि शेष जनपदों से आए 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को होगा। इस प्रकार दो दिनों में कुल 223 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण में यह समझ विकसित की जा रही है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सैनिटरी पैड की उपलब्धता तक सीमित न रखते हुए सुरक्षित टॉयलेट, पानी, साबुन, उचित निस्तारण, गोपनीयता, जागरूकता और सहयोगी वातावरण से जोड़कर देखा जाए।
हर जनपद से तीन मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार
राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से नामित तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सहभागिता की।
मास्टर ट्रेनर पहुंचाएंगे प्रशिक्षण को विद्यालयों तक
राज्य स्तर पर प्रशिक्षित तीनों मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जनपदों में जाकर सभी विद्यालयों के महिला एवं पुरुष शिक्षक-शिक्षिकाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस व्यवस्था के माध्यम से राज्य स्तर पर तैयार प्रशिक्षण सामग्री और समझ को सीधे विद्यालय स्तर तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों को मासिक धर्म स्वास्थ्य, बालिकाओं की गरिमा एवं गोपनीयता, संवेदनशील व्यवहार, आवश्यक सुविधाओं तथा विद्यालय में सहयोगी वातावरण तैयार करने से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
‘पैड से आगे’ व्यापक व्यवस्था पर जोर
प्रशिक्षण में स्पष्ट किया जा रहा है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अर्थ केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना नहीं है। विद्यालयों में क्रियाशील बालिका शौचालय, पानी और साबुन की उपलब्धता, सुरक्षित निस्तारण व्यवस्था, गोपनीयता तथा आपात स्थिति में आवश्यक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण सामग्री में भी टॉयलेट, पानी, साबुन और सुरक्षित निस्तारण को मासिक धर्म स्वास्थ्य की आवश्यक आधारभूत व्यवस्था के रूप में रेखांकित किया गया है।
जागरूकता से बदलेगा विद्यालयी वातावरण
प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष मासिक धर्म से जुड़े मिथकों, झिझक और भेदभाव को दूर करना है। शिक्षकों को यह समझाया जा रहा है कि संवेदनशील और वैज्ञानिक जानकारी से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है तथा मासिक धर्म के कारण होने वाली अनावश्यक अनुपस्थिति को कम करने में विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रशिक्षण सामग्री में मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य, गरिमा, समानता, गोपनीयता और शिक्षा से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया है।
विद्यालय स्तर पर जवाबदेही और व्यवस्थागत सुधार पर जोर
योगी सरकार की इस पहल का फोकस प्रशिक्षण के साथ-साथ विद्यालयी व्यवस्था को संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने पर है। शिक्षकों के माध्यम से बालिकाओं को आवश्यक सहयोग, सुरक्षित वातावरण और सही जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में मास्टर ट्रेनर महत्वपूर्ण कड़ी होंगे, जो राज्य स्तर की पहल को जनपद और फिर विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएंगे।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने गुरुवार काे बताया कि बालिकाओं की शिक्षा और गरिमा से जुड़ा कोई भी विषय संवेदनशीलता के साथ विद्यालय तक पहुंचना चाहिए। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक शिक्षक को आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण मिले, ताकि विद्यालयों में बेटियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण तैयार हो। प्रत्येक मास्टर ट्रेनर के माध्यम से यह प्रशिक्षण प्रदेश के सभी विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

