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परमात्मा मनुष्य के दोष नहीं, उसके अच्छे कर्म और गुणों को देखता है : आचार्य शांतनु जी महाराज

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परमात्मा मनुष्य के दोष नहीं, उसके अच्छे कर्म और गुणों को देखता है : आचार्य शांतनु जी महाराज


परमात्मा मनुष्य के दोष नहीं, उसके अच्छे कर्म और गुणों को देखता है : आचार्य शांतनु जी महाराज


श्रीराम कथा के तीसरे दिन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, आचार्य शांतनु ने बताया राम के आदर्शों का महत्व

आज़मगढ़, 18 जनवरी (हि.स.)। आजमगढ़ शहर के एस.के.पी. इंटर कॉलेज, पाण्डेय बाजार में रामायणम् परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन,आदर्शों एवं चरित्र की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म से ही अयोध्या का कण-कण पावन हो गया था और वहां के नर-नारी ने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि प्रभु के दर्शन के लिए किसी भी प्रकार के आडंबर की आवश्यकता नहीं होती।

आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि मनुष्य को जैसे वह है, वैसे ही प्रभु का स्मरण करना चाहिए। परमात्मा मनुष्य के दोष नहीं, बल्कि उसके अच्छे कर्म और गुणों को देखता है। संसार भले ही दोषों का दर्शन करता हो,लेकिन ईश्वर सदैव मानव के सद्गुणों का स्मरण करता है। उनके प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना को सशक्त करने के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य कर रही है। कथा के दौरान भक्ति संगीत, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को गहरे भाव में डुबो दिया।

कार्यक्रम के मुख्य यजमान राणा प्रताप राय ‘सोनू’ एवं तारा राय रहे। इस अवसर पर मुख्य रूप से अनिल सिंह आईपीएस, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. पवन कुमार, स्वतंत्र सिंह मुन्ना, जिला संघ चालक कामेश्वर सिंह, संदीप सिंह, दिनेश सिंह, दीपक सिंह, सुभाष चंद सिंह, आदित्य सिंह, अनिल सिंह, नितिन सिंह, कुंवर गजेंद्र, मनु राय, सौरभ सिंह, गौरव रघुवंशी एवं राघवेंद्र मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व अन्य लोग उपस्थित रहे।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव चौहान