आधार की फोटोकॉपी का झंझट खत्म, अब बिना इंटरनेट होगा पहचान सत्यापन : जिलाधिकारी
कानपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। अब पहचान सत्यापन के लिए न तो आधार की फोटोकॉपी देनी पड़ेगी और न ही ओटीपी का इंतजार करना होगा। क्यूआर कोड और आधार ऐप के जरिए बिना इंटरनेट के भी सुरक्षित और तुरंत पहचान की पुष्टि हो सकेगी। यह व्यवस्था डेटा गोपनीयता को सुरक्षित रखते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह सरल और पेपरलेस बनाती है। यह बातें शनिवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कही।
पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन के तहत अब व्यक्ति केवल क्यूआर कोड, ई-आधार या आधार ऐप के माध्यम से अपनी पहचान तुरंत सत्यापित करा सकेगा। इस प्रक्रिया में इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होगी और न ही पूरी जानकारी साझा करनी पड़ेगी, जिससे डेटा पर व्यक्ति का नियंत्रण बना रहेगा। ऑफिस, होटल और सोसाइटी गेट पर क्यूआर कोड स्कैन करते ही दस्तावेज की प्रमाणिकता की जांच की जा सकेगी। यूआईडीएआई के डिजिटल सिग्नेचर के मिलान से यह सुनिश्चित होगा कि आधार असली है और उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। सरकारी दफ्तरों और संवेदनशील परिसरों में अब डिजिटल सत्यापन से एंट्री दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर फेस वेरिफिकेशन के जरिए व्यक्ति की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जा सकेगी। रेजिडेंशियल सोसाइटी में मेहमानों, डिलीवरी कर्मियों और घरेलू सहायकों की एंट्री अब डिजिटल तरीके से दर्ज होगी, जिससे फर्जी पहचान पर रोक लगेगी जिलाधिकारी ने कहा कि वित्तीय संस्थानों में ग्राहक सत्यापन तेज और सुरक्षित होगा। डिजिटल सिग्नेचर आधारित डेटा से केवाईसी प्रक्रिया सरल हो जाएगी और अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत कम पड़ेगी। यह व्यवस्था आधार धारक, सत्यापन करने वाली संस्था और यूआईडीएआई पर आधारित है, जिसमें सहमति के आधार पर ही जानकारी साझा की जाती है। यह प्रणाली आधार अधिनियम 2016 और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत लागू है। डिजिटल सिग्नेचर के कारण साझा की गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणिक रहती है। यूआईडीएआई के अनुसार संस्थाओं को ओवीएसई के रूप में पंजीकरण कराना होगा, जिसके बाद वे आधार ऐप के जरिए ऑफलाइन सत्यापन की सुविधा शुरू कर सकेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

