भाजपा ने अखिलेश यादव के ‘मुकदमे वापसी’ बयान पर उठाए सवाल, बृजलाल बोले- कानून से ऊपर कोई सरकार नहीं
- सपा के पिछले कार्यकाल के रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर फैसला करे जनता
- एकता, सुरक्षा और कानून का शासन सर्वोपरि, अपराध और आतंकवाद स्वीकार्य नहीं
लखनऊ, 31 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में मिशन 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सत्ता में आने पर झूठे मुकदमे वापस लेने के बयान पर भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष (पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश) बृजलाल ने तीखा पलटवार किया है।
सोशल मीडिया फेसबुक पर जारी वीडियो में बृजलाल ने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को पहले कानून समझना चाहिए। किसी भी आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद उसका अंतिम निर्णय न्यायालय करता है, न कि सरकार। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में गंभीर मामलों में भी मुकदमे वापस लेने की कोशिशें की गईं, जो न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत थीं।
-अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे तब नहीं जाते थे नोएडा
राज्यसभा सांसद बृजलाल ने अखिलेश यादव के नोएडा से मिशन 2027 की शुरुआत पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब ज्योतिषीय कारणों से नोएडा नहीं जाते थे। अब वहीं से चुनावी अभियान शुरू करना उनके पुराने रुख के विपरीत है। उन्होंने कहा, आश्चर्य है कि नोएडा को अपशकुन मानने वाले अखिलेश यादव ने अपने मिशन 2027 की शुरुआत नोएडा से ही की है।
-बिजनौर से हुई थी वर्ग विशेष पर लगे मुकदमों को वापस लेने की शुरुआत
सांसद बृजलाल ने कहा कि 2012-13 के दौरान सपा सरकार के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय चुनावी वादे के तहत कुछ वर्ग विशेष के लोगों पर लगे मुकदमों को वापस लेने की बात कही गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनवरी 2013 में बिजनौर से जुड़े एक मामले से इसकी शुरुआत हुई और मार्च 2013 में वाराणसी के दशाश्वमेध घाट ब्लास्ट तथा गोरखपुर ब्लास्ट से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की गई।
-सीआरपीएफ कैंप पर हमले जैसे गंभीर मामले में सपा का हस्तक्षेप
बृजलाल ने कहा कि अप्रैल 2013 में लखनऊ के वजीरगंज मामले समेत कई अन्य मामलों में भी मुकदमे वापस लेने के प्रयास हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि 18 अप्रैल 2013 को एक साथ 10 मामलों की चार्जशीट वापस लेने की कोशिश की गई, जिनमें रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमले जैसे गंभीर मामले शामिल थे। इसमें कई जवान शहीद हुए थे।
-पुलिस अधिकारियों को भी नहीं बख्शा
उन्होंने बाराबंकी आतंकी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद जैसे आरोपितों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने की पहल की गई थी। खालिद मुजाहिद की मौत के बाद पुलिस अधिकारियों पर ही मुकदमा दर्ज कराया गया। जबकि वे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में लगे थे।
-सपा शासन में हुए अपराध, भाजपा राज में हुई कार्रवाई
हालिया मुरादाबाद के मैनाठेर मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2011 में पुलिस अधिकारियों पर हमले के मामले में अदालत ने हाल ही में 16 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
-अपराधियों और आतंकवाद से जुड़े तत्वों पर सपा मेहरबान
बृजलाल ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के तहत अपराधियों और आतंकवाद से जुड़े तत्वों के प्रति नरमी दिखाई गई। उत्तर प्रदेश में अब ऐसी राजनीति स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की कि वे सपा के पिछले कार्यकाल के रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए फैसला करें। प्रदेश की एकता, सुरक्षा और कानून का शासन सर्वोपरि है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

