सीएसजेएमयू में धूमधाम से मनाया गया नव संवत्सर 2083 : कुलपति
कानपुर, 19 मार्च (हि.स.)। नव संवत्सर 2083 सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाते हुए इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाना हमारी पहचान है। विश्वविद्यालय में इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं। यह बातें गुरुवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में गुरुवार को नव संवत्सर 2083 का उत्सव धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित हुई।
दीन दयाल शोध केंद्र में कर्मकांड विभाग के विद्यार्थियों और आचार्यों ने मां भगवती का विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर प्रतिकुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने कहा कि वर्ष प्रतिपदा का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सृष्टि की रचना हुई थी।
विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों में भी उत्सव का विशेष उत्साह देखने को मिला। स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. सुधांशु पांडिया ने विद्यार्थियों को हिंदी नववर्ष के महत्व से अवगत कराया, वहीं स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी की निदेशक डॉ. अनुराधा कालानी ने इस दिन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी दी।
अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज में भारतीय संस्कृति और परंपरा पर चर्चा हुई, जबकि कंप्यूटर एप्लीकेशंस विभाग में मां दुर्गा की आराधना की गई। स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने सामूहिक प्रस्तुति दी।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर डॉक्युमेंट्री प्रदर्शित की गई और छात्रों ने अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही कालगणना के महत्व पर भी चर्चा की गई।
अन्य विभागों जैसे स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज, हेल्थ साइंसेज, फार्मास्यूटिकल साइंस और आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज में भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रंगोली, पाठ और विचार गोष्ठियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने उत्सव में बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
इस प्रकार पूरा विश्वविद्यालय नव संवत्सर के उल्लास में सराबोर नजर आया और इसे भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

