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पादप विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा: अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन

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पादप विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा: अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन


पादप विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा: अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन


पादप विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा: अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन


पादप विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा: अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन


पादप विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा: अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन


पादप विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा: अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन


गोरखपुर, 13 अप्रैल (हि.स.)। पादप विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में अत्याधुनिक प्रकाश संश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन सोमवार को हुआ। यह प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद, लखनऊ के वित्तीय सहयोग से स्थापित की गई है।

इस आधुनिक प्रयोगशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा प्रो. राजर्षि गौर (उप महानिदेशक, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद) की उपस्थिति में किया गया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कृषि एवं पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी समकालीन चुनौतियों के समाधान हेतु सुदृढ़ वैज्ञानिक अवसंरचना के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला विभाग की शोध क्षमताओं को नई दिशा प्रदान करेगी। इस प्रयोगशाला की स्थापना एवं विकास में वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रामवंत गुप्ता के नेतृत्व एवं समर्पित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

यह प्रयोगशाला प्रकाश संश्लेषण, पादप कार्यकी विज्ञान तथा पर्यावरणीय तनाव जीवविज्ञान के उन्नत शोध हेतु एक विशेष केंद्र के रूप में विकसित की गई है। यहां कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की विभिन्न सांद्रताओं का प्रकाश संश्लेषण की दक्षता पर प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा, जो वैश्विक जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादकता के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए गए हैं, जिनमें Mini-PAM फ्लोरोमीटर (क्लोरोफिल फ्लोरेसेंस विश्लेषण हेतु), स्पेक्ट्रोफोटोमीटर (जैव-रासायनिक एवं एंजाइमेटिक अध्ययन हेतु), तथा भू-विजन मृदा विश्लेषक (मिट्टी के स्वास्थ्य के मूल्यांकन हेतु) प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त गार्डियन मल्टीसेंसरी मीटर, CCI मीटर, pH मीटर, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC) मीटर तथा NDVI मीटर जैसे उन्नत उपकरण भी उपलब्ध हैं, जो उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक अध्ययन को संभव बनाएंगे।

यह प्रयोगशाला छात्रों एवं शोधार्थियों को पादपों की जैविक प्रतिक्रियाओं, फसल उत्पादकता में सुधार तथा जलवायु-संवेदनशील एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली के विकास में योगदान हेतु एक सशक्त मंच प्रदान करेगी। साथ ही, यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों—विशेष रूप से SDG-2 (शून्य भूख) एवं SDG-3 (स्वास्थ्य एवं कल्याण)—के अनुरूप भी है।

इस अवसर पर विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अजय सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी, प्रो. राजवंत राव, शोध प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. दिनेश यादव, प्रो. शरद मिश्रा, प्रो. पूजा सिंह, प्रो. वी.एस. वर्मा, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. दीपा, डॉ. स्मृति एवं डॉ. अमित उपाध्याय सहित अनेक शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय