जटिल महाधमनी सूजन का बिना ओपन सर्जरी आधुनिक उपचार सफल : डॉ. सुनील कुमार
कानपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। महाधमनी में सूजन और कमजोरी का यह मामला अत्यंत जोखिमपूर्ण था, जिसमें किसी भी समय धमनी फटने की आशंका बनी हुई थी, ऐसे में बिना बड़ी शल्य क्रिया के भीतर से सहारा देने वाली तकनीक अपनाकर हमने मरीज को सुरक्षित किया और गंभीर स्थिति को नियंत्रित किया। यह बातें शनिवार को हृदय एवं वक्ष शल्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार ने कही।
बैकुंठपुर स्थित पारस हेल्थ में 67 वर्षीय मरीज का जटिल महाधमनी रोग (एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिका, महाधमनी प्रभावित होती है। महाधमनी हृदय से निकलकर पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाती है।) बिना ओपन सर्जरी के सफलतापूर्वक उपचार किया गया। मरीज की महाधमनी में लगभग दस सेंटीमीटर तक गंभीर सूजन पाई गई थी, जो अत्यंत खतरनाक स्थिति थी और किसी भी समय जानलेवा रक्तस्राव का कारण बन सकती थी।
काहूकोठी निवासी गिरीश चंद्र गौड़ लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रहे थे। 16 जनवरी को अचानक तेज दर्द और रक्तचाप बढ़ने की समस्या के बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इसके बाद परिजन उन्हें कई अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन जटिलता के कारण स्पष्ट उपचार नहीं मिल सका और लगातार चिंता बढ़ती गई।
अंततः मरीज को पारस हेल्थ कानपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के पास लाया गया, जहां विस्तृत जांच, सीटी स्कैन और अन्य परीक्षणों के आधार पर उपचार की योजना बनाई गई। चिकित्सकों ने निर्णय लिया कि बिना ओपन सर्जरी के न्यूनतम चीरा तकनीक से इलाज किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में जांघ की रक्त वाहिका के माध्यम से एक विशेष धातु जालीदार नली को शरीर के भीतर महाधमनी तक पहुंचाया गया। इस नली ने कमजोर हिस्से को अंदर से सहारा दिया और रक्त प्रवाह को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया, जिससे धमनी फटने का खतरा काफी हद तक समाप्त हो गया। पूरी प्रक्रिया अत्यंत सूक्ष्म निगरानी और टीमवर्क के साथ की गई।
प्रक्रिया के दौरान संज्ञाहरण विशेषज्ञों के लिए भी यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति थी, क्योंकि मरीज की हालत को देखते हुए विशेष तकनीक अपनाई गई। इससे मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित रही और जोखिम को न्यूनतम रखा गया।
हृदय रोग विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में समय पर निर्णय और आधुनिक तकनीक का उपयोग मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पहले ऐसे मामलों में केवल बड़ी ओपन सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता था, लेकिन अब कम जोखिम वाली तकनीकें उपलब्ध हैं।
इलाज के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बनी हुई है और उसमें लगातार सुधार देखा जा रहा है।
मरीज की बेटी गुंजन ने बताया कि शुरुआत में स्थिति बहुत डरावनी थी और परिवार पूरी तरह चिंतित था, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने जिस तरह भरोसा दिलाया और तुरंत इलाज शुरू किया, उससे उन्हें उम्मीद मिली। उन्होंने कहा कि “हमने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन यहां आकर हमारे पिता को नया जीवन मिला है, इसके लिए हम पूरी टीम के आभारी हैं।”
परिजनों ने भी चिकित्सकीय टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें यहां उम्मीद से बेहतर उपचार मिला और मरीज को नया जीवन मिला।
यह मामला आधुनिक चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञता और टीमवर्क का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने यह साबित किया कि जटिल से जटिल हृदय रोगों का भी सुरक्षित और प्रभावी इलाज संभव है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

