आवारा कुत्तों की पहचान के लिए माइक्रो चिप पर दिया जाए जोर : अर्पित उपाध्याय
कानपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम नई तकनीकों के उपयोग पर विचार कर रहा है। पारंपरिक तरीकों के साथ अब आधुनिक व्यवस्था अपनाकर श्वानों की पहचान और निगरानी को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इससे नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान भी संभव हो सकेगा। योजना के तहत कुत्तों की सटीक पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन को मजबूत किया जाएगा। “माइक्रो चिप से श्वानों की पहचान और निगरानी अधिक प्रभावी हो सकेगी। यह बातें बुधवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहीं।
नगर निगम के नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने फूलबाग स्थित एनीमल बर्थ कंट्रोल (डॉग्स) सेंटर का दौरा किया। इस दौरान मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. निरंजन, वेटनरी सर्जन डॉ. हेमंत राजपूत सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस दौरान ऑपरेशन थियेटर, कैनल कक्ष और कार्यालय का जायजा लिया गया तथा मार्च माह के कार्यों के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। अधिकारियों ने बताया कि आवारा कुत्तों को पकड़कर सेंटर लाया जाता है, जहां उनकी नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया जाता है तथा पहचान के लिए ईयर नॉचिंग की जाती है। इसके बाद दो दिन की देखभाल के उपरांत उन्हें उनके मूल स्थान पर छोड़ दिया जाता है।
वर्तमान में शहर के दो एबीसी सेंटरों में प्रतिदिन करीब 60 और प्रतिमाह 1800 कुत्तों की सर्जरी की जा रही है। यह कार्य संस्था फ्रेंडिकोज सेका द्वारा संचालित किया जा रहा है।
नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि कुत्तों में माइक्रो चिप लगाने की व्यवस्था पर जानकारी एकत्र कर तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि भविष्य में उनकी पहचान और ट्रैकिंग को और प्रभावी बनाया जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

