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कानपुर : मर्चेंट नेवी अफसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर पहुंचा, सम्मान की मांग पर अड़े परिजन

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कानपुर : मर्चेंट नेवी अफसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर पहुंचा, सम्मान की मांग पर अड़े परिजन


कानपुर, 05 अगस्त (हि.स.)। यूक्रेन के ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले मर्चेंट नेवी के चीफ अफसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके कानपुर के शास्त्री नगर स्थित आवास पहुंचा। ताबूत में बेटे का शव देखते ही मां रामादेवी और पत्नी शालू का दर्द छलक पड़ा। दोनों ताबूत से लिपटकर बिलखने लगीं। घर में मौजूद परिजनों और रिश्तेदारों की आंखें भी नम हो गईं। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में रिश्तेदार, परिचित और स्थानीय लोग जुट गए। भतीजी लक्ष्मी, भाभी ज्योति और बड़ी बहन पूजा रो-रोकर बदहवास हो गईं। परिवार के सदस्यों को संभालना मुश्किल हो गया। हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी कि परिवार ने अपना बेटा ही नहीं, बल्कि देश का एक बहादुर सपूत खो दिया है।

बड़े भाई मनीष गुप्ता भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि परिवार ने सरकार से अनुरोध किया था कि सागर के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक तिरंगे में लपेटा जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने स्वयं बाजार से तिरंगा खरीदकर अपने छोटे भाई के पार्थिव शरीर पर ओढ़ाया। उन्होंने कहा कि सागर ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जान गंवाई है, इसलिए उन्हें शहीद का सम्मान मिलना चाहिए।

परिजनों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। फिलहाल पार्थिव शरीर को डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया है। परिवार की ओर से सागर को शहीद का दर्जा देने, उनकी पत्नी शालू को सरकारी नौकरी और दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की जा रही है।

सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। सदर तहसील के तहसीलदार विनय कुमार द्विवेदी ने परिजनों से मुलाकात कर उनकी बातें सुनीं। हालांकि परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

परिवार के मुताबिक, सागर गुप्ता वर्ष 2018 में डीजी शिपिंग के माध्यम से नवी मुंबई स्थित एक शिपिंग कंपनी में भर्ती हुए थे और वर्तमान में मर्चेंट नेवी में चीफ अफसर के पद पर कार्यरत थे। बीते जून में वह ड्यूटी पर गए थे और बाद में रूस पहुंचे। 18 जुलाई को ब्लैक सी में उनके जहाज पर यूक्रेन की ओर से ड्रोन हमला किया गया। बताया गया कि पहले हमले के बाद सागर ने जहाज पर मौजूद आठ क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद वह जहाज को सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने का प्रयास कर रहे थे, तभी दूसरा हमला हुआ, जिसमें उनकी जान चली गई। घटना की जानकारी परिवार को तीन दिन बाद मिली थी, जिसके बाद से परिजन उनके पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

अब सागर का पार्थिव शरीर घर पहुंचने के बाद पूरे परिवार की निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं। घर में पसरा सन्नाटा, अपनों की सिसकियां और ताबूत के पास बैठी मां की नम आंखें उस दर्द को बयां कर रही थीं, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप