मेगा विधिक सहायता शिविर: 37 विभागों ने दीं सेवाएं, 722 लोगों को मिला सीधा लाभ
उरई, 22 फ़रवरी(हि.स.)। राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई के परिसर में रविवार को एक मेगा विधिक सहायता शिविर का भव्य आयोजन किया गया, जहां न्याय और जनकल्याण का संगम देखने को मिला। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और कानूनी जानकारी को जरूरतमंदों तक सीधे पहुंचाना रहा।
इस शिविर की सबसे खास बात रही 'डिलीवरी मोड' पर आयोजन। यहां विभिन्न विभागों ने मिलकर एक ऐसा मंच तैयार किया, जहां लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। कुल 37 विभागों ने अपने स्टॉल लगाए, जिनमें राजस्व, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, श्रम, बैंकिंग, महिला कल्याण जैसे प्रमुख विभाग शामिल थे। इन स्टालों पर 722 लाभार्थियों ने विभिन्न योजनाओं का पंजीकरण कराते हुए मौके पर ही लाभ प्राप्त किया।
शिविर में जहां एक ओर सरकारी योजनाओं की बाढ़ थी, वहीं दूसरी ओर छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रस्तुति से समां बांध दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने लोगों का ध्यान खींचा और सामाजिक मुद्दों पर गहरी चोट की। नाटक के माध्यम से घरेलू हिंसा, बाल श्रम, शिक्षा के अधिकार और किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों को सजीवता से प्रस्तुत किया गया।
एक विशेष दृश्य में दिखाया गया कि कैसे एक किसान मजबूरी में कर्ज लेता है और समय पर भुगतान न होने पर उसे साहूकारों द्वारा प्रताड़ित किया जाता है। छात्रों ने अपने अभिनय से यह संदेश दिया कि किसान का पसीना सोना है, उसका हक नहीं खोना है। उन्होंने बताया कि कानून गरीब, असहाय, महिला, बच्चे और किसान हर वर्ग के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार देता है।
बता दें कि शिविर का शुभारंभ करते हुए जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39(क) में निःशुल्क विधिक सहायता का प्रावधान है। उन्होंने कहा, आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है। उन्होंने लोगों से अन्याय की स्थिति में विधिक सेवा प्राधिकरण का सहयोग लेने की अपील की।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि गरीब, असहाय और कमजोर वर्ग के लोगों को संरक्षण मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध वसूली, धमकी या सामाजिक शोषण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।
पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने कानून व्यवस्था को लेकर लोगों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा, घरेलू हिंसा, बाल श्रम या कर्ज के बहाने किसी को प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध है। पुलिस ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से कार्रवाई करेगी। उन्होंने छात्रों के नुक्कड़ नाटक की प्रशंसा करते हुए कहा कि सामाजिक जागरूकता ही अपराध की सबसे मजबूत रोक है।
अपर जिला जज प्रथम सतीश द्विवेदी ने कहा कि विधिक साक्षरता समाज को सशक्त बनाती है, जबकि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती शाम्भवी ने बताया कि जिन लोगों को तत्काल लाभ नहीं मिल पाया, उनका फॉलोअप कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विशाल कुमार वर्मा

