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सरकार कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध:  मयंकेश्वर शरण सिंह

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सरकार कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध:  मयंकेश्वर शरण सिंह


लखनऊ, 23 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि राज्य ने पिछले दस वर्षों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हम जेई पर काबू पा चुके हैं और पिछले तीन वर्ष में इस बीमारी से प्रदेश में एक भी बच्चे की मृत्यु नही हुई है। इसी तरह सिकल सेल एनीमिया और सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ भी जंग जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए भी प्रतिबद्ध है।

उत्तर प्रदेश में कुष्ठ रोग के नए मामलों की शीघ्र पहचान, संक्रमण की रोकथाम, दिव्यांगता में कमी और प्रभावित व्यक्तियों के गरिमापूर्ण जीवन के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत प्राथमिकता वाले जिलों और ब्लॉकों की पहचान, स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, नियमित समीक्षा और प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक सेवाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए 23 और 24 अक्टूबर को लखनऊ के ताज महल होटल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, आईएलईपी इंडिया, निप्पोन फाउंडेशन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, विकास सहयोगियों, शिक्षाविदों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने अनुभव साझा किए तथा कुष्ठ उन्मूलन की रणनीतियों पर चर्चा की।

मंत्री ने कहा रोग से जुड़ा सामाजिक कलंक अब भी चुनौती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के साथ मिलकर चिन्हित दस विषयों पर काम करेगी, ताकि कुष्ठ-मुक्त उत्तर प्रदेश का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने कहा कि अधिक मामले वाले जिलों में सघन रोगी खोज अभियान चलाकर शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सीएचओ और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के नेटवर्क को मजबूत करने, उनकी क्षमता बढ़ाने और कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों को सामाजिक बहिष्कार से बचाने पर जोर दिया।

भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ. इवान जे.-एफ. हुटिन वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुष्ठ रोग की प्रसार दर प्रति 10,000 आबादी पर 0.34 है, जो राज्य की प्रतिबद्धता दर्शाती है। हालांकि, छिपे हुए मामलों की पहचान और निदान में देरी अब भी चुनौती है। सम्मेलन में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज और आयुष विभागों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन से प्राप्त सुझावों के आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

सम्मेलन में केंद्र सरकार के केंद्रीय कुष्ठ रोग प्रभाग, सात उच्च प्रसार वाले राज्यों के राज्य कुष्ठ रोग अधिकारियों और उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों ने भाग लिया। बीएचयू, केजीएमयू, आगरा मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर सहित चिकित्सा संस्थानों, त्वचा रोग विशेषज्ञों, विभिन्न चिकित्सा संगठनों, कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और मीडियाकर्मियों ने भी सहभागिता की।

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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन