“मातृभूमि योजना” बन रही बदलाव की नई पहचान : ओमप्रकाश राजभर
लखनऊ, 22 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाइयां नहीं, बल्कि जनभागीदारी, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक विकास की मजबूत पहचान बनती जा रही हैं। अपनी मिट्टी, अपने गांव और अपनी पंचायत के प्रति लोगों का बढ़ता जुड़ाव विकास कार्यों में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यही भावना “मातृभूमि योजना” को एक सामान्य सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर जनसहभागिता के सशक्त अभियान के रूप में स्थापित कर रही है।
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जारी बयान में कहा कि मातृभूमि योजना केवल विकास कार्यों की योजना नहीं, बल्कि समाज और पंचायत के बीच विश्वास, सहभागिता और जिम्मेदारी को मजबूत करने का अभियान है। जब समाज स्वयं अपनी पंचायत के विकास के लिए आगे आता है, तब विकास योजनाएं जनआंदोलन का स्वरूप ले लेती हैं। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश सरकार पंचायतों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और जनसुविधाओं से युक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
पंचायती राज मंत्री ने कहा कि मातृभूमि योजना के माध्यम से प्रदेश के अनेक नागरिक, प्रवासी भारतीय, समाजसेवी, उद्यमी एवं सामान्य ग्रामीण नागरिक अपनी पंचायतों के विकास में स्वेच्छा से योगदान दे रहे हैं। यह योजना समाज को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास यात्रा का सहभागी बना रही है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 11 जनपदों में अब तक 21 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 2.74 करोड़ रुपये है। वहीं 10 जनपदों में लगभग 3.16 करोड़ रुपये लागत की 13 परियोजनाएं वर्तमान में प्रगतिशील हैं। इसके अतिरिक्त 17 जनपदों से लगभग 3.16 करोड़ रुपये लागत की 33 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि बुलंदशहर के संजीव राजौरा ने स्पोर्ट्स काम्पलेक्स बनाने के लिए लगभग 1 करोड़ 7 लाख रूपये का सहयोग दिया। वहीं उन्नाव की फुटपेंटर शीला ने आर्ट एकेडमी बनाने के लिए लगभग 26 लाख 53 हजार रूपये का सहयोग देकर यह संदेश दिया कि इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। इसी प्रकार बागपत की सी.सी. रोड परियोजना और पंचायत स्तर पर विकसित हो रहे खेल परिसर ग्रामीण विकास की बदलती तस्वीर को दर्शा रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

