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प्रबंधन की नाकामी से गर्मियों में बिगड़ रही बिजली व्यवस्था, निजीकरण के विरोध में आंदोलन जारी

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प्रबंधन की नाकामी से गर्मियों में बिगड़ रही बिजली व्यवस्था, निजीकरण के विरोध में आंदोलन जारी


लखनऊ, 18 अप्रैल (हि.स.)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने शनिवार को कहा कि पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की विफलताओं के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था गर्मियों में लगातार चरमराती जा रही है। आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

संघर्ष समिति के आह्वान पर निजीकरण तथा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में चल रहे आंदोलन के क्रम में शनिवार काे बागपत और गाजियाबाद में विरोध सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, मोहम्मद वसीम और निखिल कुमार ने मुख्यतया भाग लिया।

श्री दुबे ने बताया कि बड़े पैमाने पर संविदाकर्मियों की छंटनी, नियमित कर्मचारियों के अनियोजित स्थानांतरण तथा स्वीकृत पदों में कटौती के कारण बिजली व्यवस्था पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद कार्यों के आवंटन में मनमानी बदलाव किए जाने से स्थिति और बिगड़ी है, जिससे उपभोक्ता इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं और व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही है।

अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से गैर-अनुभवी कर्मियों से काम लिया जा रहा है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। बढ़ती मांग के इस दौर में ट्रांसफॉर्मर, सब-स्टेशन और स्विचगियर पर बढ़ते लोड को संभालने में ऐसे कर्मियों को कठिनाई हो रही है। इसके अतिरिक्त प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था भी अव्यवस्थित हो गई है। कई उपभोक्ताओं के बिल नकारात्मक (निगेटिव) आ रहे हैं, तो कई मामलों में भुगतान के बावजूद कनेक्शन बहाल नहीं हो रहा है।

संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे माहौल में बिजली कर्मियों को उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के निर्देशों के बावजूद उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं की गईं, बल्कि उसके बाद इनमें और वृद्धि हुई है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहेंगे, किंतु प्रबंधन द्वारा उत्पन्न अव्यवस्था का खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति में उपभोक्ता, किसान और कर्मचारी सभी परेशान हैं।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता और सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं की जातीं, तब तक बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय