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बीमा क्लेम खारिज करना कंपनी को पड़ा भारी, अदालत ने डंपर मालिक को 15 लाख रुपये देने का दिया आदेश

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बांदा, 19 अगस्त (हि.स.)। दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम खारिज करना आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी की आपत्तियों को पर्याप्त न मानते हुए बुधवार को डंपर मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने 11.97 लाख रुपये के मूल क्लेम पर छह प्रतिशत ब्याज सहित कुल 15 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि महज संदेह और जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर वैध बीमा क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता है।

शहर के स्वराज कालोनी, सिविल लाइंस निवासी जय सिंह ने अपना डंपर संख्या यूपी-90 टी-8673 आईसीआईसीआई लोम्बार्ड से बीमित कराया था। पॉलिसी चार मार्च 2022 से तीन मार्च 2023 तक प्रभावी थी और वाहन को दुर्घटना समेत जीरो डेप्रिसिएशन कवर दिया गया था।

याची के अनुसार 12 मार्च 2022 की शाम करीब 7.30 बजे फतेहपुर के चौफेरवा के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने डंपर में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में डंपर का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वाहन को अधिकृत सर्विस सेंटर एक्सेल व्हीकल्स,कानपुर ले जाया गया, जहां मरम्मत में 11,97,144 रुपये खर्च हुए। वाहन को सर्विस सेंटर तक ले जाने में 13 हजार रुपये खर्च होने का भी दावा किया गया। बीमा कंपनी ने जांच के बाद क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने चालक और वाहन मालिक के बयानों में अंतर, हेल्पर की मौजूदगी, एफआईआर दर्ज न होने,केन के बिल और सर्विस सेंटर की गेट एंट्री की तारीख में अंतर समेत कई बिंदुओं पर सवाल उठाए थे।

बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि हादसा इतना गंभीर था कि वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बावजूद चालक को मामूली चोट आना संदेह पैदा करता है। जांच एजेंसी ने चालक के बयान और वाहन मालिक के बयान में हेल्पर को लेकर भी अंतर बताया। कंपनी ने वाहन में जीपीएस और फास्टैग के काम न करने तथा घटना की पुलिस में रिपोर्ट दर्ज न होने को भी क्लेम खारिज करने का आधार बनाया। जांच एजेंसी ने हादसे को संदिग्ध मानते हुए फोरेंसिक जांच की सिफारिश की थी,लेकिन बीमा कंपनी ने फोरेंसिक जांच कराए बिना ही क्लेम निरस्त कर दिया।

स्थायी लोक अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि दुर्घटना और वाहन के क्षतिग्रस्त होने की बात दोनों पक्षों के सामने थी। वाहन के बीमा समेत जरूरी दस्तावेज भी सही पाए गए। अदालत ने माना कि जांच एजेंसी ने हादसे को संदिग्ध तो बताया, लेकिन उसके समर्थन में पर्याप्त ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने यह भी माना कि चालक को गंभीर चोट न आना अपने आप में दुर्घटना के झूठे होने का प्रमाण नहीं है। इसी तरह एफआईआर दर्ज न होना अथवा केन के बिल और गेट एंट्री की तारीख में एक दिन का अंतर भी पूरे क्लेम को खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह एवं सदस्या शिवांगी शुक्ला ने मामले की सुनवाई के बाद बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज किए जाने के आधारों को अपर्याप्त माना। अदालत ने डंपर मालिक के 11,97,144 रुपये के मूल दावे पर छह प्रतिशत ब्याज समेत कुल 15 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह