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लखनऊ कचहरी के बाहर वकीलों के बने चैंबरों पर चला बुलडोजर, विरोध में सड़क पर उतरे अधिवक्ता

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लखनऊ कचहरी के बाहर वकीलों के बने चैंबरों पर चला बुलडोजर, विरोध में सड़क पर उतरे अधिवक्ता


लखनऊ कचहरी के बाहर वकीलों के बने चैंबरों पर चला बुलडोजर, विरोध में सड़क पर उतरे अधिवक्ता


लखनऊ कचहरी के बाहर वकीलों के बने चैंबरों पर चला बुलडोजर, विरोध में सड़क पर उतरे अधिवक्ता


- हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने की कार्रवाई, भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच चला ध्वस्तीकरण

लखनऊ, 25 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार सुबह कैसरबाग स्थित जिला न्यायालय के बाहर फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर बने वकीलों के चैंबरों को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण कर रही है। कार्रवाई का विरोध करते हुए कई अधिवक्ता सड़क पर धरने पर बैठ गए। कुछ वकीलों के बुलडोजर के सामने आने और उस पर चढ़ने की भी सूचना है। स्थिति को देखते हुए इलाके में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।

नगर निगम की ओर से चैंबरों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाया जा रहा है। कार्रवाई से पहले संबंधित चैंबरों पर लाल निशान लगाए गए थे और नोटिस भी जारी किए गए थे। करीब 250 चैंबरों को हटाया जा रहा है। ध्वस्तीकरण की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि की जानी बाकी है।

कार्रवाई के लिए मौके पर करीब 10 बुलडोजर और मलबा हटाने के लिए 10 हाइवा लगाए गए हैं। किसी तरह की बाधा, हंगामे या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है।

चैंबर हटाने का विरोध, आजीविका प्रभावित होने की चिंता

ध्वस्तीकरण का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि उन्होंने अपनी जमा-पूंजी खर्च कर चैंबर बनाए थे। इनके हटने से उनके कामकाज और आजीविका पर असर पड़ेगा। प्रदर्शनकारी वकीलों में अनिल तिवारी, घनश्याम सिंह, देवेंद्र गर्ग आदि ने प्रशासन पर बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए चैंबर हटाने का आरोप लगाया। इस दौरान महिला अधिवक्ता भावुक दिखीं।

विरोध कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि चैंबर उनके पेशे से जुड़ी बुनियादी जरूरत हैं और उन्हें हटाने से पहले उनके लिए उचित विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई के प्रति अपना राजनीतिक विरोध भी जताया और कहा कि वे आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देंगे।

दूसरी ओर, नगर निगम की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर बने निर्माणों को हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन का जोर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और ध्वस्तीकरण पूरा कराने पर है।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा