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मुरादाबाद का पोषण पुनर्वास केंद्र बना नजीर, कुपोषण से जंग में अव्वल

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मुरादाबाद का पोषण पुनर्वास केंद्र बना नजीर, कुपोषण से जंग में अव्वल


मुरादाबाद में ठाकुरद्वारा के अलावा कांठ और बिलारी में भी 10-10 बेड के नए एनआरसी बनाने की तैयारी

मुरादाबाद, 08 अगस्त (हि.स.)। जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र पैंसिया और मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी के प्रयास से कुपोषण के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में मुरादाबाद जिला अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संचालित इस केंद्र की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यहां चिकित्सकों की दिन-रात की समर्पित देखभाल के चलते गंभीर अति कुपोषित (सैम) बच्चों के पूरी तरह स्वस्थ होने (रिकवरी रेट) का आंकड़ा जो वर्ष 2022 में 86 फीसदी था, वह इस साल जुलाई तक बढ़कर 95 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है।

बीते करीब साढ़े चार वर्षों में इस केंद्र ने 1,148 गंभीर अति कुपोषित बच्चों को मौत के मुंह से निकालकर नया जीवन दिया है। केंद्र की इस बेमिसाल सफलता और जरूरत को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देश पर अब यहां बेड की क्षमता 10 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है।

केंद्र का क्योर रेट (स्वस्थ होने की दर) लगातार बेहतर हो रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2022 में 197 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें क्योर रेट 86 प्रतिशत रहा। वर्ष 2023 में 299 दाखिलों के साथ क्योर रेट 77 प्रतिशत रहा। वर्ष 2024 में 279 बच्चे भर्ती हुए और क्योर रेट 82 प्रतिशत रहा। वर्ष 2025 में 225 बच्चों के दाखिले पर क्योर रेट 86 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, वर्ष 2026 में 31 जुलाई तक 148 अति कुपोषित बच्चे भर्ती किए जा चुके हैं और क्योर रेट उछाल मारकर 90 प्रतिशत से ज्यादा के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो इस केंद्र की बढ़ती गुणवत्ता का प्रमाण है।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल