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कुशीनगर : नारायणी रॉकेट्री कप में दिखी वैज्ञानिक सोच, बच्चों के प्रयोगों से लेकर विशेषज्ञों की तकनीकी कसौटी तक रही चर्चा

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कुशीनगर : नारायणी रॉकेट्री कप में दिखी वैज्ञानिक सोच, बच्चों के प्रयोगों से लेकर विशेषज्ञों की तकनीकी कसौटी तक रही चर्चा


कुशीनगर : नारायणी रॉकेट्री कप में दिखी वैज्ञानिक सोच, बच्चों के प्रयोगों से लेकर विशेषज्ञों की तकनीकी कसौटी तक रही चर्चा


कुशीनगर : नारायणी रॉकेट्री कप में दिखी वैज्ञानिक सोच, बच्चों के प्रयोगों से लेकर विशेषज्ञों की तकनीकी कसौटी तक रही चर्चा


कुशीनगर : नारायणी रॉकेट्री कप में दिखी वैज्ञानिक सोच, बच्चों के प्रयोगों से लेकर विशेषज्ञों की तकनीकी कसौटी तक रही चर्चा


कुशीनगर : नारायणी रॉकेट्री कप में दिखी वैज्ञानिक सोच, बच्चों के प्रयोगों से लेकर विशेषज्ञों की तकनीकी कसौटी तक रही चर्चा


- कैनसैट से जुटाए मौसम और पर्यावरण के आंकड़े, चेन्नई की टीम ने खींचीं 36 हजार तस्वीरें

- स्कूली बच्चों ने बनाए स्मार्ट होम, सेंसर आधारित दरवाजे और दृष्टिबाधितों के लिए स्मार्ट चश्मे के मॉडल

कुशीनगर, 03 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के नारायणी नदी के तट पर पिपराघाट जंगली पट्टी में आयोजित इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 का मंगलवार को समापन हो गया। चार दिनों तक चले इस राष्ट्रीय आयोजन में मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता का खिताब अहमदाबाद की निरमा यूनिवर्सिटी ने अपने नाम किया, जबकि कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन में चेन्नई के डॉ. एमजीआर एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम ने पहला स्थान हासिल किया।

प्रतियोगिता में देश के 17 राज्यों की 76 छात्र टीमों ने हिस्सा लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी कौशल, वैज्ञानिक सोच और नवाचार का प्रदर्शन किया। आयोजन में 43 कैनसैट और 18 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए गए। अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े इस आयोजन में विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ स्थानीय स्कूली बच्चों की भागीदारी भी आकर्षण का केंद्र रही।

कैनसैट प्रतियोगिता में भुवनेश्वर की सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी की टीम दूसरे और बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की टीम तीसरे स्थान पर रही। मॉडल रॉकेट्री में कोयंबटूर के करुण्या इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज ने दूसरा और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। कैनसैट श्रेणी में जम्मू की सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बेस्ट टीम और बिट्स पिलानी के हैदराबाद परिसर को बेस्ट डिजाइन अवार्ड दिया गया। वहीं, मॉडल रॉकेट्री में मुंबई के द्वारकादास जे. संघवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को बेस्ट टीम और पुणे के पिंपरी चिंचवड़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को बेस्ट डिजाइन अवार्ड मिला। दोनों प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीमों को ईवी सोसाइटी बेंगलुरु की ओर से पुरस्कृत किया गया। आईटेलीमैटिक्स सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड आयोजन का उद्योग साझेदार रहा।

इन-स्पेस की ओर से आयोजित तीसरी कैन-7यूसेट इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन और दूसरी नेशनल मॉडल रॉकेट्री इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन में विद्यार्थियों ने रॉकेट और कैनसैट के डिजाइन, निर्माण और परीक्षण की पूरी प्रक्रिया में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में कुल 61 लॉन्चिंग हुईं। इनके प्रदर्शन का मूल्यांकन इसरो, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), इन-स्पेस, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों की समितियों ने किया। विशेषज्ञों ने केवल सफल लॉन्चिंग ही नहीं, बल्कि उपकरणों की तकनीकी क्षमता, डिजाइन, नवाचार, उड़ान के दौरान स्थिरता और सुरक्षित वापसी को भी परखा।

इन-स्पेस के निदेशक (प्रमोशन निदेशालय) डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के समर्पण और सालभर की मेहनत से प्रतियोगिता का यह संस्करण सफल रहा। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी क्षमता परखने, व्यावहारिक अनुभव से सीखने और भारत के बढ़ते अंतरिक्ष तंत्र में योगदान देने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से ही प्रयोग और तकनीक से जोड़ना जरूरी है।

इसरो के पूर्व एसोसिएट निदेशक और मॉडल रॉकेट्री मूल्यांकन समिति के प्रमुख रॉय एम. चेरियन ने कहा कि रॉकेट्री और उपग्रह प्रणालियां जटिल इंजीनियरिंग प्रणालियां हैं। इनके निर्माण में गाइडेंस, संचार और नियंत्रण जैसे कई तकनीकी विषयों का समन्वय जरूरी होता है। विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में उपयोगी विचार और तकनीकी क्षमता दिखाई है। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने डिजाइन में सुधार करने और व्यावहारिक पहलुओं पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही कहा कि पुरस्कार प्राप्त करने वाली टीमों के अलावा अन्य प्रतिभागियों के प्रयास भी सराहनीय हैं।

देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने वीडियो संदेश के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी अंतरिक्ष प्रयोग केंद्र स्थापित करने की आकांक्षा जताई। कहा कि ऐसा केंद्र स्थापित होने से स्थानीय युवाओं को पूरे वर्ष रॉकेट्री और अन्य वैज्ञानिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को वास्तविक तकनीकी चुनौतियों से परिचित कराने और वैज्ञानिक नवाचार को समुदायों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने आयोजन से क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिलने वाले अवसरों को महत्वपूर्ण बताया।

बता दें कि सांसद शशांक मणि त्रिपाठी की पहल पर वर्ष 2025 से यहां रॉकेट्री प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। पिछले वर्ष प्रतियोगिता में 24 कैनसैट और 13 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए गए थे। इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर क्रमशः 43 और 18 हो गई। इससे प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की भागीदारी और तकनीकी गतिविधियों का विस्तार सामने आया है।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक