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कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका

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कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


कुशीनगर : पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आया है तेजी से बदलाव : डॉ. पवन कुमार गोयनका


- कुशीनगर में राष्ट्रीय रॉकेट्री प्रतियोगिता का आगाज, पहले दिन 20 कैनसैट का प्रक्षेपण

- 17 राज्यों की 76 टीमों ने लिया हिस्सा, निरमा यूनिवर्सिटी ने लॉन्च किया पहला मॉडल रॉकेट; विद्यार्थियों को मिला अंतरिक्ष तकनीक का व्यावहारिक अनुभव

कुशीनगर, 01 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में नारायणी नदी के तट पर पिपराघाट में रविवार को राष्ट्रीय स्तर की इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता के पहले दिन विभिन्न टीमों की ओर से तैयार किए गए 20 कैनसैट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। वहीं, मॉडल रॉकेट्री श्रेणी में अहमदाबाद की निरमा यूनिवर्सिटी ने पहला मॉडल रॉकेट लॉन्च कर प्रतियोगिता की शुरुआत की। तीन नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में देश के 17 राज्यों की 76 चयनित टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसमें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थी अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, तकनीकी कौशल और नवाचार का प्रदर्शन कर रहे हैं।

इसके अलावा विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, मार्गदर्शक और प्रतिभागी भी शामिल हुए।

इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार गोयनका ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है। वर्ष 2019 में देश में केवल 14 स्पेस स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या 450 से अधिक हो चुकी है। यह बदलाव अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। अब विद्यार्थी अंतरिक्ष यात्री बनने के साथ ही प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने, उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर नए अनुप्रयोग तैयार करने और अपना उद्यम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में भाग ले रहे विद्यार्थियों का उत्साह और आत्मविश्वास उनकी मेहनत तथा तैयारी को दर्शाता है। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाए जाने वाले सैद्धांतिक ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का अवसर देते हैं। रॉकेट और कैनसैट तैयार करने से लेकर उनके प्रक्षेपण तक की प्रक्रिया में विद्यार्थियों को तकनीकी चुनौतियों को समझने और उनका समाधान खोजने का अनुभव मिलता है।

देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे देश के छोटे शहरों और टियर-2 तथा टियर-3 जिलों तक पहुंचाना आवश्यक है। कुशीनगर और देवरिया जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक प्रतियोगिताओं का आयोजन स्थानीय विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि रॉकेट या कैनसैट के प्रयोग में असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय उससे सीखने का प्रयास करें। धैर्य, टीमवर्क और निरंतर प्रयास ही भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों की पहचान बनेंगे।

इन-स्पेस के निदेशक (प्रमोशन) डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण और कैनसैट इंडिया प्रतियोगिता के चौथे संस्करण के लिए पंजीकरण एक दिसंबर 2026 से शुरू होंगे। दोनों प्रतियोगिताओं में कुल 10 ट्रॉफियां प्रदान की जाएंगी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में रोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रतियोगिता के साथ रोजगार मेले का भी आयोजन किया गया है। इसमें चार स्पेस कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर की संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी मिलेगी।

उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने का अवसर देती हैं। इससे उनमें तकनीकी दक्षता, समस्या समाधान की क्षमता, नवाचार और टीम के साथ काम करने का कौशल विकसित होता है। ऐसे अनुभव भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

स्थानीय आयोजक संस्था श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक मनीष बजाज ने प्रतिभागी टीमों, उनके शिक्षकों और मार्गदर्शकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के साथ संवाद करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाली संस्थाओं, निर्णायक मंडल के सदस्यों और स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रतियोगिता में तीन नवंबर तक विभिन्न टीमों के मॉडल रॉकेट और कैनसैट से जुड़े प्रयोगों का प्रदर्शन होगा। इस आयोजन से पूर्वांचल के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट तकनीक और उपग्रह निर्माण की बारीकियों को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।

इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की ओर से इसरो और श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (एसएसडीएफ) के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार गोयनका, निदेशक (प्रमोशन) डॉ. विनोद कुमार, इसरो के पूर्व एसोसिएट रॉय एम. चेरियन, कैनसैट मूल्यांकन समिति के प्रमुख डॉ. सुरेंद्र पाल तथा स्थानीय आयोजक संस्था एसएसडीएफ के निदेशक मनीष बजाज मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक