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कानपुर की 'कृषि सखियां' दिखा रहीं आत्मनिर्भरता का रास्ता

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कानपुर की 'कृषि सखियां' दिखा रहीं आत्मनिर्भरता का रास्ता


कानपुर की 'कृषि सखियां' दिखा रहीं आत्मनिर्भरता का रास्ता


- खेत-खलिहान की 'एक्सपर्ट' बनीं विनय कुमारी और किरण देवी, आधुनिक तकनीक की दे रहीं जानकारी

- चूल्हे-चौके की दहलीज लांघकर सैकड़ों महिलाओं को स्वावलंबन और समृद्धि का पाठ पढ़ा रहीं कृषि सखी

कानपुर, 03 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाए जा रहे 'मिशन शक्ति' और 'राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। घाटमपुर के मवई माधो और जुरैया गाँव की 'कृषि आजीविका सखियों' ने अपनी मेहनत और जज्बे से यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नारी को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वह कृषि प्रधान भारत की असली नायक बन सकती है। इन दो कृषि सखियों का प्रयास गाँव की दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भरता का रास्ता भी दिखा रहा है।

विनय कुमारी : मवई माधो के खेतों की नई पहचान

मवई माधो गाँव की रहने वाली विनय कुमारी 'बजरंग बली सहायता समूह' के माध्यम से आज एक सशक्त नाम बनकर उभरी हैं। वर्ष 2022 और 2024 में गहन कृषि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद विनय ने खुद को मात्र अपने खेत तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आज वे करीब 40 ग्रामीण महिलाओं को उन्नत खेती के गुर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।

उनकी इस सफलता के पीछे उनके पति शेष नारायण का अटूट सहयोग और बच्चों—बेटी शैव्या (कक्षा 8) व बेटे एकलव्य (कक्षा 6) के बेहतर भविष्य का संकल्प छिपा है। विनय आज न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं के लिए सशक्तिकरण की मिसाल भी हैं।

किरण देवी: जुरैया गाँव की 'मृदा विशेषज्ञ'

वहीं, जुरैया गाँव की किरण देवी 'महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह' के जरिए महिलाओं के जीवन में खुशहाली का रंग भर रही हैं। अब तक 119 महिलाओं को जागरूक कर चुकीं किरण देवी की सबसे बड़ी उपलब्धि मिट्टी की सेहत के प्रति उनकी सजगता है। उन्होंने अब तक 100 से अधिक खेतों का मृदा परीक्षण (मिट्टी जाँच) सुनिश्चित कराया है, ताकि किसानों को उर्वरकों के सही उपयोग की जानकारी मिल सके। उनकी इसी निष्ठा ने उन्हें गाँव की महिलाओं की 'प्रेरणा' बना दिया है।

कृषि आजीविका सखी के मुख्य कार्य

- जैविक कृषि को प्रोत्साहन: रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव बताकर प्राकृतिक खाद और 'वेस्ट डीकंपोजर' जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना।

- मिट्टी की सेहत की रक्षा: समय-समय पर खेतों की मिट्टी की जाँच कराकर संतुलित उर्वरक प्रबंधन सिखाना।

- उन्नत फसल चक्र: मिश्रित खेती और उन्नत बीजों के माध्यम से पैदावार में बढ़ोतरी करना।

- सरकारी योजनाओं से जुड़ाव: ग्रामीण महिलाओं को समूह के माध्यम से सरकारी सब्सिडी और कृषि यंत्रों की जानकारी उपलब्ध कराना।

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हिन्दुस्थान समाचार / अजय सिंह