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बाढ़ के खतरे से निपटने को प्रशासन तैयार, 176 गांवों पर 24 घंटे नजर : जिलाधिकारी

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बाढ़ के खतरे से निपटने को प्रशासन तैयार, 176 गांवों पर 24 घंटे नजर : जिलाधिकारी


कानपुर, 18 अगस्त (हि.स.)। बाढ़ की किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है। सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी होने पर भी प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित शरणालयों में पहुंचाकर राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। यह बातें मंगलवार को कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बाढ़ की तैयारियों की समीक्षा के दौरान कहीं।

गंगा और अन्य सहायक नदियों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। गंगा, यमुना, पांडु, नून और रिंद नदियों के कैचमेंट क्षेत्र में आने वाले 176 गांवों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है। इनमें घाटमपुर के 58, सदर के 54, बिल्हौर के 51 और नर्वल के 12 गांव शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त टीमें 24 घंटे निगरानी कर रही हैं। जिले में 35 बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं, जबकि आपात निकासी के लिए 101 बाढ़ शरणालयों में पेयजल, बिजली, सचल शौचालय और चिकित्सा संबंधी व्यवस्थाएं की गई हैं।

प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने के लिए 1100 सूखा राहत किट तैयार हैं। प्रत्येक किट में भोजन, राशन, तिरपाल, मोमबत्ती, माचिस और दवाइयों समेत 26 आवश्यक सामग्री शामिल हैं। इनसे चार से पांच सदस्यों वाले परिवार को करीब एक सप्ताह तक मदद मिल सकेगी।

रेस्क्यू और राहत कार्यों के लिए पूर्व सैनिकों का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्हें नाव संचालन, जीवन रक्षक जैकेट के इस्तेमाल, प्राथमिक चिकित्सा और आपात स्थिति में राहत समन्वय का प्रशिक्षण देकर संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

बाढ़ नियंत्रण कार्यालय के अनुसार कानपुर बैराज के ऊपरी हिस्से में गंगा का जलस्तर 113.610 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी बिंदु 114 मीटर से 39 सेंटीमीटर नीचे है। डाउनस्ट्रीम जलस्तर 113.460 मीटर और डिस्चार्ज 2,95,637 क्यूसेक दर्ज किया गया। शुक्लागंज में जलस्तर 112.220 मीटर है।

हरिद्वार बैराज से 1,10,194 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,15,137 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप