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श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ पूज्य चालिहो महोत्सव का शुभारंभ

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श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ पूज्य चालिहो महोत्सव का शुभारंभ


श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ पूज्य चालिहो महोत्सव का शुभारंभ


श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ पूज्य चालिहो महोत्सव का शुभारंभ


गोरखपुर, 16 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सिंधी समाज के आराध्य देव श्री झूलेलाल के पावन पूज्य चालिहो महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को श्रद्धा, आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, विधिवत कलश पूजन और अखंड ज्योति की स्थापना के बीच मंदिर एवं आश्रम परिसर भगवान श्री झूलेलाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठे। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन कर समाज की उन्नति, राष्ट्र की खुशहाली और विश्व में शांति एवं सद्भाव की प्रार्थना की।

महोत्सव के प्रथम चरण में सुबह 7:30 बजे झूलेलाल मंदिर, गोरखनाथ में पूर्ण विधि-विधान से कलश पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अखंड ज्योति की स्थापना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान झूलेलाल के चरणों में पुष्प अर्पित कर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की।

इसके उपरांत पूर्वाह्न नौ बजे से 10 बजे तक पूज्य माता साहिब आश्रम, जटाशंकर, गोरखपुर में भी कलश पूजन एवं अखंड ज्योति स्थापना का पावन अनुष्ठान संपन्न हुआ। अखंड ज्योति प्रज्वलित होते ही आश्रम परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।

इस अवसर पर पूज्य माता माया दीदी तथा साईं रविदास महाराज गौतम जी ने पूर्ण वैदिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं अखंड ज्योति स्थापना का अनुष्ठान संपन्न कराया। उन्होंने भगवान श्री झूलेलाल से समाज के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की प्रार्थना की। साथ ही राष्ट्र की उन्नति, मानव कल्याण और विश्व शांति की मंगलकामना भी की गई।

कार्यक्रम में दीवान चंद साधवानी, ओम प्रकाश रूपरेला, उमेश बिजलानी, प्रेम कटियार, राजेश कृपलानी, मूलचंद घवारी, लाजपत बुधवानी, विभिन्न पंचायतों के मुखी साहिबान, महामंत्री देवा केशवानी, सिंधी अकादमी के सदस्य नरेश बजाज, युवा सिंधी समाज के उपाध्यक्ष विक्की कुकरेजा तथा नरेश कर्मचंदानी सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, श्रद्धालु और मातृशक्ति उपस्थित रहे।

इस अवसर पर महामंत्री देवा केशवानी ने कहा कि पूज्य चालिहो महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सिंधी समाज की आस्था, एकता, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व है। यह आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, धार्मिक परंपराओं और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।

उन्होंने कहा कि भगवान झूलेलाल की शिक्षाएं प्रेम, भाईचारे, करुणा, सद्भाव और मानव सेवा का संदेश देती हैं। धर्म का वास्तविक स्वरूप केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, समाज में सौहार्द की स्थापना और मानवता की सेवा भी धर्म का महत्वपूर्ण अंग है।

देवा केशवानी ने कहा कि पूज्य चालिहो महोत्सव नई पीढ़ी को सिंधी समाज की संस्कृति, भाषा, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है। किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और संस्कारों से होती है। इसलिए युवाओं को अपनी परंपराओं को समझने, अपनाने और आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने समाज के सभी परिवारों, विशेषकर युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे महोत्सव के आगामी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करें। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही सिंधी भाषा, संस्कृति, परंपरा और धार्मिक विरासत को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित एवं सशक्त रूप से पहुंचाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि भगवान झूलेलाल सिंधी समाज की आस्था, अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। उनकी शिक्षाएं प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, न्याय, करुणा और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। पूज्य चालिहो महोत्सव समाज को संगठित करने और नई पीढ़ी को अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

मातृशक्ति एवं युवा श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक पूजन-अर्चन में सहभागिता की। भगवान झूलेलाल के जयघोष, भजन और प्रार्थनाओं से मंदिर एवं आश्रम परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने अखंड ज्योति के दर्शन कर परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम के समापन पर भगवान श्री झूलेलाल की आरती की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने समाज की उन्नति, राष्ट्र की समृद्धि, मानवता की रक्षा तथा विश्व में शांति और सद्भाव की स्थापना के लिए सामूहिक प्रार्थना की।

सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य चालिहो महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने, समाज में सेवा एवं सहयोग की भावना को सुदृढ़ करने तथा भगवान श्री झूलेलाल के प्रेम, भाईचारे और मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय