स्मार्ट सिटी : दहशत में बालाजी रेजीडेंसी के 50 परिवार, घरों में भरा तीन दिन से पानी
झांसी, 27 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में स्मार्ट सिटी के दावों के बीच कोतवाली क्षेत्र की फिल्टर रोड स्थित बालाजी रेजीडेंसी इन दावों की हकीकत का ऐसा नमूना बन गई है, जिसे देखकर इंजीनियरिंग भी शायद अपना सिर पकड़ ले। यहां करीब 50 परिवार पिछले तीन साल से जलभराव और जल निकासी की समस्या से जूझ रहे हैं। पिछले तीन दिनों की भारी बारिश ने हालात को ऐसा बना दिया है कि सड़क और घर में फर्क करना मुश्किल हो गया है।
कॉलोनी के दोनों ओर से पानी घुस रहा है और निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। कई घरों में करीब डेढ़ फुट तक पानी भर गया है। घरों में रखा सामान तैर रहा है और कई मकान मानो निजी स्वीमिंग पूल में तब्दील हो गए हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां तैरने के लिए पानी के साथ चिंता और डर भी मुफ्त मिल रहा है।
कॉलोनी के सोसायटी अध्यक्ष संजय गोयल लंबे समय से समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। करीब तीन माह पहले नगर आयुक्त से मिलने पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें यह जवाब मिला कि समय नहीं है, नगर निगम में बहुत काम हैं। शायद 50 परिवारों की परेशानी उन कामों की सूची में शामिल होने लायक नहीं थी।
बारिश ने अब हालात और भयावह कर दिए हैं। कॉलोनी में लगा ट्रांसफार्मर भी लोगों के लिए खतरे का सबब बना हुआ है। ऊपर बिजली और नीचे पानी के बीच जिंदगी पूरी तरह राम भरोसे है। घरों में मौजूद लोग दहशत में रात काट रहे हैं, जबकि बाहर गए परिवारजन अपने माता-पिता और परिजनों की चिंता में सो नहीं पा रहे।
कॉलोनी निवासी संजय दीक्षित का कहना है कि तीन दिनों से घरों में पानी भरा है। लखनऊ गए उज्जवल श्रीवास्तव को अपने घर में मौजूद माता-पिता और बहन की चिंता सता रही है।
बालाजी रेजीडेंसी कोई अकेली कहानी नहीं है। पठौरिया, मेंहदीबाग, नरिया, प्रेमनगर, गरिया फाटक, सीपरी और शिवाजी नगर समेत शहर के दर्जनों इलाकों में जलभराव ने स्मार्ट सिटी की पोल खोल दी है।
सवाल यही है कि जब बारिश में सड़कें तालाब और घर स्वीमिंग पूल बन जाएं, तो आखिर स्मार्ट क्या है—सिटी या सिर्फ उसका नाम?
हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

