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आरोप : भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीएम ग्रिड निर्माण परियोजना, मुख्यमंत्री काे भेजा गया पत्र

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आरोप : भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीएम ग्रिड निर्माण परियोजना, मुख्यमंत्री काे भेजा गया पत्र


सीएम ग्रिड फेज-3 निर्माण निविदा में अनियमितताओं की जांच की मांग, उपसभापति ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

इससे पूर्व आरोपों की जांच के लिए महापौर भी लिख चुके हैं पत्र

झांसी, 01 जुलाई (हि.स.)।

झांसी नगर निगम के उपसभापति आशीष तिवारी ने बुधवार काे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर सीएम ग्रिड फेज -3 सड़क निर्माण परियोजना की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की अनदेखी की गई और नियमों के विपरीत एक कंपनी को लाभ पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उपसभापति ने कहा है कि प्रतिभागी कंपनी द्वारा लगभग 200 करोड़ रुपये की मौजूदा वित्तीय प्रतिबद्धताओं (Existing Commitments) की जानकारी छिपाई गई। इसके अलावा कंपनी ने अपने मुकदमों के इतिहास (Litigation History) और कार्य अनुभव (Experience) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का भी सही खुलासा नहीं किया। इन सभी बिंदुओं से संबंधित दस्तावेजी प्रमाण और विस्तृत आपत्तियां संबंधित अधिकारियों को पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी थीं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि निविदा की शर्त संख्या 4.8.1 के अनुसार यदि कोई फर्म अपने प्रपत्रों, विवरणों या अन्य दस्तावेजों में भ्रामक अथवा असत्य जानकारी प्रस्तुत करती है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसके बावजूद उपलब्ध कराए गए प्रमाणों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और मुख्य अभियंता द्वारा आपत्तियों की अनदेखी करते हुए संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाया गया।

आशीष तिवारी ने कहा कि इससे पूरी निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच के दौरान प्रस्तुत सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण कराया जाए।

उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं और अधिकारियों की संलिप्तता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कंपनी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सार्वजनिक धन की सुरक्षा और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

गौरतलब है कि इस संबंध में नगर निगम के महापौर महानगर के प्रथम नागरिक बिहारी लाल आर्य ने भी मामले में प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग 16 जून को ही कर चुके हैं। अब देखना यह है कि मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कब तक होती है।

इनका है कहना

इस संबंध में जब मुख्य अभियंता राजवीर सिंह यादव से बात की गई तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए गेंद नगर आयुक्त के पाले में उछाल दी। कहा कि वही इस मामले में जानकारी देंगी। आश्चर्यजनक बात यह है कि आरोपी मुख्य अभियंता की कार्यप्रणाली पर है फिर भला इसमें ईमानदार छवि वाली नगर आयुक्त को बीच में क्यों घसीटा गया ?

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया